Share This Article

गुरु गोविंद दोनों खड़े, काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।

ज्ञान की ज्योति सभी में जलाते,
अज्ञानता को दूर भगाते।

पहली शिक्षक माँ हमारी,
अनपढ़ हो या शिक्षित नारी।

शिक्षक ही हैं विकास की सीढ़ी,
नमन करें हम पीढ़ी दर पीढ़ी।

शिक्षक सभी को संस्कार देते,
जीवन को सुंदर- सफल बनाते।

अच्छे-बुरे का ज्ञान कराते,
सही राह पर हमें चलाते।

शिक्षक कभी नहीं भटकाते,
मुश्किल में राह दिखाते।

शिक्षक बिन हम दिशाहीन हैं,
शिक्षक संग हम कभी नहीं दीन हैं।

गुरु का सम्मान सदा करते जाएँ,
ज्ञान की रोशनी फैलाते जाएं ।

शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ,
शिक्षकों का सदा सम्मान बढ़ाएँ।

गुरु के बताए मार्ग पर चलकर,
अपना जीवन सफल बनाएँ।।

लेखिका – सुधा केशरवानी, नागपुर

जीवन परिचय

सुधा केसरवानी,
जन्म स्थान – सागर (म.प्र)
सागर यूनिवर्सिटी से बीएससी, बीएड तथा नागपुर यूनिवर्सिटी से MA Public Administration और हिंदी साहित्य में एम ए

जीवन शिक्षिका एवं मुख्य अध्यापिका के रूप में , सेवानिवृत्ति के उपरांत समाज के लिए कुछ करने की कोशिश,

रुचि- लेखन एवं पठन-पाठन में , सभी के अच्छे स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए समर्पित.


Share This Article