Harshit Godha, upon returning from the UK, spotted a major opportunity in avocados; he started his journey with ₹50 lakh and built a business worth ₹1 crore.UK
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न्यू दिल्ली, 05 सितंबर। UK से मार्केटिंग में ग्रेजुएशन करने वाले हर्षित गोधा की नजर एक ऐसे फल पर पड़ी, जिसकी भारत में मांग तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन स्थानीय सप्लाई अभी भी सीमित थी। यह फल था एवोकाडो, जिसे आज दुनिया के लोकप्रिय सुपरफूड्स में गिना जाता है। महज एक लेबल ने हर्षित की सोच बदल दी और देखते ही देखते उन्होंने एवोकाडो की खेती को अपना बिजनेस मिशन बना लिया।

22 साल की उम्र में बदली सोच, ‘इज़राइल से आया’ लेबल बना टर्निंग पॉइंट

हर्षित जब 22 साल के थे और लंदन में इंटर्नशिप कर रहे थे, तब उनकी नजर एवोकाडो पर लगे ‘Sourced from Israel’ लेबल पर पड़ी। इसी ने उनके मन में सवाल खड़ा किया कि आखिर इज़राइल में एवोकाडो की खेती किस तकनीक से होती है और भारत में इसे बड़े स्तर पर क्यों नहीं किया जा सकता।

इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए उन्होंने इज़राइल में करीब एक महीना बिताया। वहां उन्होंने एवोकाडो की आधुनिक खेती, बाग प्रबंधन और उत्पादन तकनीकों को करीब से समझा और सीधे किसानों से बातचीत की। इस अनुभव ने उन्हें भारत लौटकर कुछ अलग करने के लिए प्रेरित किया।

₹50 लाख लगाए, भोपाल की बंजर जमीन को बनाया एवोकाडो फार्म

पढ़ाई पूरी करने के बाद हर्षित भारत लौटे और 2019 में करीब ₹50 लाख का निवेश कर मध्य प्रदेश के भोपाल में 5 एकड़ बंजर जमीन पर एवोकाडो उत्पादन का प्रयोग शुरू किया। उन्होंने हाइड्रोपोनिक सिस्टम और आधुनिक तकनीकों की मदद से इस जमीन को एवोकाडो बाग में बदलने की दिशा में काम किया।

हालांकि सफर आसान नहीं था। सरकारी प्रक्रियाओं, अनुमति और आयात से जुड़ी देरी के कारण उन्हें अपने पहले एवोकाडो पौधों के लिए करीब तीन साल तक इंतजार करना पड़ा। आखिरकार उन्होंने 1,800 पौधे इम्पोर्ट किए और अपने मिशन को आगे बढ़ाया।

20 हजार से ज्यादा पौधों की नर्सरी, किसानों के लिए बनाया पूरा नेटवर्क

हर्षित ने सिर्फ खुद एवोकाडो उगाने तक अपना काम सीमित नहीं रखा। उन्होंने ब्लॉग और ई-बुक के जरिए जानकारी साझा की, सोशल मीडिया पर खेती का अनुभव बताया और किसानों की मदद के लिए YouTube चैनल शुरू किया। धीरे-धीरे एवोकाडो की खेती में रुचि रखने वाले किसानों का एक कम्युनिटी नेटवर्क तैयार हो गया।

2021 में उन्होंने भोपाल में ‘इंडो-इज़राइल एवोकाडो नर्सरी’ बिजनेस शुरू किया। अब उनकी नर्सरी में 20,000 से ज्यादा पौधे बताए जाते हैं। गुजरात, असम और सिक्किम समेत कई राज्यों में किसान एवोकाडो की खेती कर रहे हैं, जबकि हर्षित की नर्सरी आधुनिक तकनीक से तैयार पौधों पर फोकस करती है।

Hass और Pinkerton जैसी इंटरनेशनल किस्मों पर फोकस

BBC को दिए इंटरव्यू के मुताबिक, हर्षित के वेंचर की वैल्यू अब करीब ₹1 करोड़ बताई गई है और उन्होंने देशभर के किसानों को लगभग 18,000 एवोकाडो पौधे सप्लाई किए हैं। इनमें Hass और Pinkerton जैसी इंटरनेशनल किस्में शामिल हैं, जिनकी मांग प्रीमियम एवोकाडो मार्केट में है।

हर्षित के मुताबिक, भारत में पारंपरिक रूप से एवोकाडो के पेड़ दूसरी फसलों के बीच या छाया के लिए लगाए जाते रहे हैं, जबकि इज़राइल में इसे एक प्रोफेशनल कमर्शियल क्रॉप की तरह मैनेज किया जाता है। इज़राइल की कम बारिश और आधुनिक सिंचाई व्यवस्था ने वहां एवोकाडो उत्पादन के लिए एडवांस्ड तकनीकों के विकास में अहम भूमिका निभाई है।

एवोकाडो की खेती में छंटाई और परागण सबसे अहम

हर्षित बताते हैं कि कमर्शियल एवोकाडो बाग लगाने में सिर्फ पौधे लगा देना पर्याप्त नहीं है। पेड़ों की सही ऊंचाई बनाए रखने के लिए नियमित pruning यानी छंटाई जरूरी है। एक एवोकाडो का पेड़ छह से सात साल में करीब 25 फीट तक बढ़ सकता है, जिससे बिना सही pruning के फल तोड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा एवोकाडो की खेती में pollination यानी परागण की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। अधिक उत्पादन के लिए अलग-अलग किस्मों के पौधों को सही तरीके से लगाना जरूरी होता है, ताकि फूलों के नर और मादा चरणों के बीच प्रभावी परागण हो सके। यही तकनीकी बारीकियां एक सामान्य एवोकाडो बाग और सफल कमर्शियल फार्म के बीच बड़ा अंतर पैदा कर सकती हैं।

आज हर्षित गोधा की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल बन चुकी है, जो विदेश में पढ़ाई या नौकरी के बाद भारत लौटकर कृषि और एग्रीटेक में नए अवसर तलाशना चाहते हैं। एक सुपरफूड की बढ़ती मांग को पहचानकर शुरू किया गया उनका सफर अब किसानों, आधुनिक नर्सरी और एवोकाडो की खेती से जुड़े एक बड़े बिजनेस मॉडल में बदल चुका है।


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