Share This Article रायपुर, 14 सितंबर। ETrendingIndia / भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से ऑटोमोबाइल सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और कारोबार दोनों बढ़ने की उम्मीद है। समझौते के पहले साल में यूरोप से 1 लाख तक पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड कारों को भारत में रियायती शुल्क पर प्रवेश मिल सकेगा। वहीं, भारतीय कंपनियों को यूरोप में कार निर्यात बढ़ाने का बड़ा अवसर मिलेगा। यूरोपीय कारों की एंट्री बढ़ेगी पहले साल का 1 लाख कारों का रियायती कोटा 2025 में यूरोप से भारत आईं 17,191 कारों से करीब छह गुना है। 10वें साल तक यह कोटा 1.60 लाख कारों तक पहुंच सकता है। हालांकि, 15,000 यूरो से कम कीमत वाली पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड कारों को इस रियायत से बाहर रखा गया है। ईवी को शुरुआती चार साल राहत नहीं यूरोप की इलेक्ट्रिक कारों को शुरुआती चार वर्षों तक रियायती प्रवेश नहीं मिलेगा। पांचवें साल से केवल 20,000 यूरो या उससे अधिक कीमत वाली ईवी को रियायत मिल सकेगी। Maruti, Tata और Mahindra के लिए बड़ा बाजार FTA का दूसरा बड़ा फायदा भारतीय वाहन कंपनियों को हो सकता है। भारत में बनी पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड कारों के लिए EU पहले साल 2.50 लाख वाहनों का कोटा देगा, जो 10वें साल तक 4 लाख हो जाएगा। पांचवें साल तक इन पर टैरिफ शून्य करने का प्रावधान है। लग्जरी कार कंपनियों को भी फायदा मर्सिडीज-बेंज जैसी कंपनियों को टॉप-एंड कारों के ज्यादा मॉडल भारत लाने का अवसर मिलेगा। कंपनी के मुताबिक उसकी 90% से अधिक बिक्री स्थानीय स्तर पर बनी कारों से होती है, इसलिए FTA से कीमतों में तत्काल बड़ी कमी की उम्मीद नहीं है। हालांकि, आयातित प्रीमियम मॉडल का कोटा बढ़ने से ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं। कुल मिलाकर, भारत-EU FTA से भारतीय बाजार में यूरोपीय कारों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, लेकिन सस्ती कारों और शुरुआती वर्षों में ईवी को सुरक्षा देकर घरेलू ऑटो उद्योग के हितों को भी ध्यान में रखा गया है। दूसरी ओर भारतीय कार कंपनियों के लिए यूरोप में निर्यात बढ़ाने का बड़ा अवसर खुल सकता है। Share This Article Post navigation ब्रिक्स में एकजुटता से व्यापार और निवेश को नई रफ्तार…टैरिफ चुनौतियों पर मिलकर काम करेंगे देश टाटा संस ला सकती है देश का सबसे बड़ा IPO…! RBI के निर्देश के बाद तेज हुई तैयारी