Cyber attackCyber attack
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रायपुर, 29 सितंबर 2026 / ETrendingIndia / अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन के एक अत्यंत संवेदनशील विभाग के सर्वर में लंबे समय तक अवैध घुसपैठ का मामला सामने आया है। रक्षा जनशक्ति डेटा केंद्र के सर्वर में अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 तक करीब नौ महीने तक सेंध बनी रही। इस दौरान 27.6 लाख से अधिक मौजूदा कर्मियों और करीब 2.94 लाख मृत व्यक्तियों से संबंधित निजी रिकॉर्ड उजागर होने की जानकारी सामने आई है। सबसे गंभीर बात यह है कि संवेदनशील जानकारी बिना कूटबद्ध किए यानी बिना एन्क्रिप्शन के सुरक्षित रखी गई थी।


रक्षा जनशक्ति डेटा केंद्र अमेरिकी सेना का प्रमुख डिजिटल रिकॉर्ड केंद्र है। यह करीब छह करोड़ से अधिक सक्रिय सैन्यकर्मियों, रिजर्व कर्मियों, पूर्व सैनिकों, असैनिक कर्मचारियों और उनके परिवारों से संबंधित रिकॉर्ड संभालता है। सामने आई जानकारी के अनुसार, साइबर सेंधमारी में कर्मियों के पूरे नाम, सामाजिक सुरक्षा संख्या, जन्मतिथि और फोन नंबर के अलावा उनके आधिकारिक पद और जिम्मेदारियों से संबंधित विवरण भी उजागर हुए हैं।


सैन्यकर्मियों की भूमिकाओं और तैनाती से जुड़ी जानकारी के सामने आने से राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। ऐसी सूचनाओं का इस्तेमाल विरोधी देश या संगठित साइबर अपराधी समूह सैन्य ढांचे और कर्मियों से जुड़ी जानकारी जुटाने तथा रणनीतिक जासूसी के लिए कर सकते हैं।


सामाजिक सुरक्षा संख्या और व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी के उजागर होने से बड़े पैमाने पर पहचान की चोरी, लक्षित धोखाधड़ी वाले संदेश और वित्तीय ठगी का खतरा बढ़ गया है। जुलाई 2026 में सुरक्षा खामी का पता चलने के बाद पेंटागन ने तकनीकी सुधार लागू कर घुसपैठ का रास्ता बंद किया। हालांकि, रक्षा विभाग का कहना है कि अब तक उजागर हुए आंकड़ों के दुरुपयोग या किसी वित्तीय नुकसान का प्रमाण नहीं मिला है।


संभावित खतरों को देखते हुए प्रभावित लोगों को एक वर्ष के लिए मुफ्त ऋण निगरानी और पहचान सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसके अलावा सभी कर्मियों को संदिग्ध ईमेल, फोन कॉल और अन्य संपर्कों से सावधान रहने की सलाह दी गई है।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब संघीय जांच ब्यूरो के रोजगार पोर्टल में भी साइबर सेंधमारी की खबरें सामने आ चुकी हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने अमेरिकी सरकारी संस्थानों की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।


साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यंत संवेदनशील सैन्य नेटवर्क में मजबूत कूटलेखन, बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण और वास्तविक समय की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं। करीब नौ महीने तक बाहरी तत्वों की पहुंच बने रहना इस बात को लेकर भी चिंता पैदा करता है कि सुरक्षा निगरानी और तकनीकी जांच व्यवस्था में कहां चूक हुई।


इस घटना के बाद संवेदनशील सैन्य आंकड़ों की सुरक्षा, नियमित सुरक्षा जांच और साइबर हमलों की जल्द पहचान करने वाली प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। मामले की पूरी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हमलावरों ने किस स्तर तक जानकारी हासिल की और उजागर हुए आंकड़ों का किसी तरह इस्तेमाल किया गया या नहीं।


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