SC ST ActSC ST Act
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नई दिल्ली, 09 अक्टूबर 2026। SC ST Act : अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के अधिकारों की रक्षा, अत्याचार की रोकथाम और पीड़ितों को समय पर न्याय उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार कानूनी एवं संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने अपने लेख में बताया कि वर्ष 2014-15 से अब तक इन कानूनों के क्रियान्वयन के लिए 5,012.17 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई है। इस अवधि में लगभग 7,26,588 अत्याचार पीड़ितों को राहत प्रदान की गई, जबकि 2,21,716 अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपतियों को प्रोत्साहन राशि दी गई।

SC/ST अत्याचार निवारण कानून में किए गए महत्वपूर्ण बदलाव

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को अधिक प्रभावी बनाने के लिए समय-समय पर संशोधन किए गए हैं। 26 जनवरी 2016 से प्रभावी संशोधनों के तहत मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों और विशेष लोक अभियोजकों की व्यवस्था को मजबूत किया गया।

इसके साथ ही अत्याचार की कई नई श्रेणियों को कानून के दायरे में शामिल किया गया। पीड़ितों और गवाहों के अधिकारों के संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान जोड़े गए तथा राज्य सरकारों की जिम्मेदारियां बढ़ाई गईं।

14 अप्रैल 2016 को नियमों में किए गए संशोधनों के माध्यम से अत्याचार से संबंधित 47 प्रकार के अपराधों के लिए निर्धारित राहत राशि बढ़ाई गई। साथ ही पीड़ितों और उनके आश्रितों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

20 अगस्त 2018 के संशोधन के तहत अधिनियम से जुड़े मामलों में FIR दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच की अनिवार्यता समाप्त की गई। इसी प्रकार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता भी हटाई गई।

15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 217 विशेष न्यायालय

लेख में दी गई जानकारी के अनुसार, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत मामलों की सुनवाई के लिए 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 217 विशिष्ट विशेष न्यायालय स्थापित किए गए हैं।

इन न्यायालयों का उद्देश्य अत्याचार से संबंधित मामलों की सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया को तेज करना है। जिन जिलों में मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, वहां संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से सत्र न्यायालयों को विशेष न्यायालय के रूप में नामित करने का प्रावधान भी है।

अत्याचार पीड़ितों की सहायता के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन

SC और ST समुदायों के लोगों को कानूनी अधिकारों, शिकायत निवारण और उपलब्ध सहायता की जानकारी देने के उद्देश्य से 13 दिसंबर 2021 को राष्ट्रीय अत्याचार निवारण हेल्पलाइन शुरू की गई थी। बाद में इसका नाम ‘संबल’ (SAMBAL) रखा गया।

इसके माध्यम से नागरिक टोल-फ्री नंबर 1800-202-1989 और शॉर्ट हेल्पलाइन नंबर 14566 पर संपर्क कर सकते हैं।

हेल्पलाइन का उद्देश्य अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, पीड़ितों को मार्गदर्शन देना और शिकायत निवारण तंत्र तक उनकी पहुंच को आसान बनाना है।

दूसरे राज्य में जाने वाले पीड़ितों को भी राहत देने की व्यवस्था स्पष्ट

कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से योजना संबंधी दिशानिर्देश भी जारी किए हैं।

20 जून 2025 को जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, यदि कोई अत्याचार पीड़ित या उसका आश्रित एक राज्य से दूसरे राज्य में चला जाता है, तो निर्धारित राहत राशि उस राज्य या केंद्रशासित प्रदेश द्वारा प्रदान की जाएगी, जहां संबंधित अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य राहत राशि के भुगतान में होने वाली प्रशासनिक उलझनों को दूर करना और पीड़ितों को समय पर सहायता सुनिश्चित करना है।

इसके अतिरिक्त 27 जून 2018 को नियमों में संशोधन कर मृत्यु, चोट, दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म, एसिड हमले और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित विभिन्न अपराधों से संबंधित राहत प्रावधानों को और मजबूत किया गया।

5,012 करोड़ की सहायता, लाखों पीड़ितों को मिला लाभ

नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के क्रियान्वयन के लिए केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

लेख में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014-15 से अब तक इस योजना के तहत 5,012.17 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इस दौरान लगभग 7.26 लाख अत्याचार पीड़ितों को राहत और 2.21 लाख से अधिक अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपतियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।

केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता केवल अत्याचार की घटनाओं के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है। अत्याचार की रोकथाम, कानूनी जागरूकता, संस्थागत जवाबदेही, समय पर राहत और पुनर्वास को भी समान महत्व दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, गरिमा और न्याय का अधिकार प्रदान करता है। इन संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है। सरकार का प्रयास है कि SC और ST समुदायों के लिए कानूनी सुरक्षा केवल संवैधानिक वादा न रहकर उनके जीवन में वास्तविक सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर के रूप में दिखाई दे।


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