Share This Article बेंगलुरु, 1 नवंबर 2026। Nandini Milk Price Hike : कर्नाटक में नंदिनी दूध के उपभोक्ताओं को अब ज्यादा कीमत चुकानी होगी। रविवार से दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू हो गई है। इसके साथ ही दही की कीमत भी 54 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 68 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है। कीमतों में इस बदलाव से उपभोक्ताओं में नाराजगी है, जबकि बेंगलुरु मिल्क यूनियन लिमिटेड (BAMUL) और राज्य सरकार ने इसे डेयरी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए जरूरी बताया है। किसानों की आजीविका के लिए कीमत बढ़ाना जरूरी: BAMUL अध्यक्ष BAMUL के अध्यक्ष डी.के. सुरेश ने मूल्य वृद्धि का बचाव करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों की आजीविका को मजबूत करना और डेयरी क्षेत्र को टिकाऊ बनाए रखना है। उन्होंने कहा, “यदि किसान बचेंगे तो हम सभी बचेंगे। नंदिनी दूध आपके लिए महंगा जरूर होगा, लेकिन किसानों के लिए यह अच्छी खबर है। मैं कीमत बढ़ाने के लिए क्षमा चाहता हूं, लेकिन किसानों का जीवित रहना भी जरूरी है।” उन्होंने लोगों से नंदिनी ब्रांड के दूध, घी और पनीर जैसे उत्पादों का उपयोग जारी रखने की अपील भी की। दूध के साथ दही की कीमत में भी बड़ा इजाफा नई दरों के तहत दूध की कीमत में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। वहीं दही के दाम 54 रुपये से बढ़ाकर 68 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिए गए हैं। यानी दही अब 14 रुपये प्रति किलोग्राम महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी से रोजाना दूध और दही खरीदने वाले परिवारों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है। सूखे और महंगे चारे को बताया कीमत बढ़ने की वजह मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को फैसले का बचाव करते हुए कहा कि राज्य में सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है। पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध कराना भी महंगा हो गया है। उनके मुताबिक, किसानों की ओर से दूध के दाम 12 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाने की मांग की जा रही थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसानों की आय पर्याप्त नहीं होगी तो वे पशुओं के चारे पर खर्च कम करने को मजबूर हो सकते हैं। इसका असर दूध उत्पादन और पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। सरकार ने किसानों की मांग, घटते उत्पादन और पशुधन की सुरक्षा जैसे पहलुओं पर विचार करने के बाद कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। दही की कीमतों पर भी उठे सवाल दही की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सीधे तौर पर दही के दाम नियंत्रित नहीं कर सकती। दूध और उससे बनने वाले उत्पादों की कीमतों पर वसा यानी फैट की मात्रा जैसे कारकों का भी प्रभाव पड़ता है। किसानों को राहत या उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ? कर्नाटक सरकार और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) का मानना है कि नई कीमतों से दुग्ध उत्पादकों को बेहतर भुगतान मिल सकेगा। दूसरी ओर, उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि दूध और दही की कीमतें बढ़ने से आम लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। ऐसे में राज्य में डेयरी उत्पादों की कीमतों और किसानों के हितों को लेकर बहस तेज हो गई है। Share This Article Post navigation Ambuja Cements Q2 Results : दूसरी तिमाही में कंपनी की आय 9,197 करोड़ रुपये, EBITDA 1,271 करोड़ पर पहुंचा Maruti Suzuki sales : त्योहारी सीजन में ऑटो कंपनियों की बल्ले-बल्ले…! अक्टूबर में बिक्री के टूटे रिकॉर्ड