रायपुर / ETrendingIndia / आईआईटी कानपुर की टीम ने किया क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन
दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कृत्रिम वर्षा प्रयोग (Artificial Rain Experiment) की शुरुआत की गई है। पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा ने बताया कि आईआईटी कानपुर की टीम के नेतृत्व में यह दूसरा क्लाउड सीडिंग ट्रायल किया गया।
इस प्रयोग के लिए एक विमान ने आईआईटी कानपुर एयरस्ट्रिप से उड़ान भरी और राजधानी क्षेत्र में बादलों पर सीडिंग की प्रक्रिया शुरू की।
दिल्ली के कई इलाकों में क्लाउड सीडिंग परीक्षण
मंत्री सिरसा ने बताया कि खेखरा, बुराड़ी, नॉर्थ करोल बाग, मयूर विहार, सदकपुर और भोजपुर जैसे क्षेत्रों में क्लाउड सीडिंग की गई।
उन्होंने कहा कि इस ट्रायल के दौरान आठ क्लाउड सीडिंग फ्लेयर्स को पायरो तकनीक के माध्यम से छोड़ा गया।
इससे वातावरण में मौजूद बादलों में नमी को सक्रिय किया गया, जिससे दिल्ली कृत्रिम वर्षा प्रयोग सफल होने की संभावना बढ़ी।
बारिश की संभावना, प्रदूषण से राहत की उम्मीद
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि आईआईटी कानपुर की टीम का मानना है कि आने वाले कुछ घंटों में दिल्ली में बारिश हो सकती है।
यदि ऐसा होता है, तो इससे वायु प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी और नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
इसके अलावा, यह प्रयोग भविष्य में बड़े पैमाने पर वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम
दिल्ली कृत्रिम वर्षा प्रयोग राज्य सरकार के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राजधानी में हर सर्दी बढ़ते स्मॉग को कम करना है।
सरकार ने पहले भी कई बार इस तकनीक को आजमाने की योजना बनाई थी, लेकिन यह दूसरा सफल ट्रायल माना जा रहा है।
इस प्रयोग से उम्मीद है कि भविष्य में यह तकनीक भारत के अन्य प्रदूषित शहरों में भी अपनाई जाएगी।
📌 निष्कर्ष:
इस प्रकार, दिल्ली कृत्रिम वर्षा प्रयोग न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश की राजधानी के लिए स्वच्छ हवा की दिशा में एक ठोस कदम भी है।
