Share This Article रायपुर 6 जून 2026/ ETrendingIndia / “Mizoram’s capital Aizawl becomes an example of ‘no-horn culture'” मिजोरम की राजधानी आइजोल देश में बेहतर यातायात अनुशासन और नागरिक जिम्मेदारी का उदाहरण बनकर उभरी है। यहां के लोगों ने स्वेच्छा से ‘नो हॉर्न संस्कृति’ अपनाई है, जिससे शहर में ध्वनि प्रदूषण काफी कम हुआ है। आइजोल में सड़क पर जाम लगने या वाहनों की भीड़ होने पर भी चालक बेवजह हॉर्न नहीं बजाते। लोग धैर्य और अनुशासन के साथ अपनी बारी का इंतजार करते हैं। यही कारण है कि व्यस्त सड़कों पर भी अनावश्यक शोर सुनाई नहीं देता। पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर मिजोरम में, यातायात नियमों के पालन, पैदल यात्रियों के सम्मान और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासित व्यवहार की अच्छी परंपरा देखने को मिलती है। स्थानीय नागरिक मानते हैं कि हॉर्न का उपयोग केवल जरूरत पड़ने पर ही किया जाना चाहिए। ध्वनि प्रदूषण के साथ मानसिक शांति पर नकारात्मक प्रभाव विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बजने वाले हॉर्न से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आइजोल की पहल यह संदेश देती है कि केवल सरकारी नियमों से ही नहीं, बल्कि नागरिकों की जागरूकता और अच्छे व्यवहार से भी शहरों को अधिक शांत, सुरक्षित और रहने योग्य बनाया जा सकता है। मिजोरम के यहां संदेश पूरे देश के नागरिकों के लिए है कि अनावश्यक हॉर्न बजाने से बचें, यातायात नियमों का पालन करें और ध्वनि प्रदूषण कम करने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। आइजोल की यह पहल देश के अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा है। Share This Article Post navigation उत्तरपूर्वी परिषद (NEC) की 73 वीं बैठक : Act East’, ‘Act First’ और ‘Act Fast’ की नीति , शांति, इंफ्रास्ट्रक्चर और रेल-सड़क-हवाई संपर्क ने मिटाई दूरी दूरसंचार विभाग : भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं के बीच अरुणाचल प्रदेश के चार जिलों में अंतर-अंचल रोमिंग सेवा शुरू ,आपदा-स्थिति में निर्बाध दूरसंचार संपर्क सुनिश्चित हो सकेगा…