US-Iran deal
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रायपुर,16 जून 2026/ ETrendingIndia / “Israeli Minister: Fumes over US-Iran deal, says ‘Trump’s agreement does not apply to us’.” अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की बनी सहमति से इजरायल बुरी तरह भड़क गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मंत्री इस पर कड़ा प्रतिरोध दर्ज करा रहे हैं।

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगा। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समझौता हम पर लागू नहीं होता। उन्होंने कहा कि इजरायल अमेरिका के अधीन नहीं है।

काट्ज ने एक बयान में कहा, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मैं एक स्पष्ट नीति का नेतृत्व कर रहे हैं जो यह निर्धारित करती है कि इजरायली सेना लेबनान, सीरिया और गाजा में सुरक्षा क्षेत्रों में बिना किसी समय सीमा के मौजूद रहेगा, ताकि वहां से सीमा और इजरायली समुदायों को जिहादी तत्वों से बचाया जा सके।

काट्ज का कहना है कि सुरक्षा क्षेत्रों को स्थानीय निवासियों से खाली कराया जाएगा और सभी आतंकी ढांचे नष्ट होंगे, हमलों का जवाब दिया जाएगा।

बेन-ग्विर ने एक्स पर लिखा कि इजरायल आजाद और संप्रभु देश है, जिसका फर्ज अपने लोगों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि जब भी इजरायल की सुरक्षा की कीमत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे घुटने टेके गए, भारी कीमत चुकानी पड़ी।

ऐसा ही ओस्लो और 2006 के लेबनान समझौते में भी यही हुआ। बेन-ग्विर ने कहा कि इजरायल अमेरिका से प्यार करता है और ट्रंप का आभार है, लेकिन यह कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है।

बिन-्ग्विर ने लिखा कि इजरायल इस समझौते में शामिल नहीं हैं क्योंकि यह हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता और हम पर किसी भी तरह से लागू नहीं होता।

हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह खत्म करने से कम किसी भी चीज़ पर समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने लिखा कि हमारे लड़ाकों ने जिन इलाकों पर कब्ज़ा किया है, वहां से पीछे नहीं हटना चाहिए। लेबनान से किए गए हमलों का इजरायल जवाब देगा, अब यहूदी कभी नहीं सहेगा।

अमेरिका-ईरान के बीच सफल शांति वार्ता होने के बाद नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने की इच्छा जताई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू इस सप्ताह फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद ट्रंप के साथ बैठक करने को जोर दे रहे हैं।

मुलाकात को लेकर संभावना जताई जा रही है कि नेतन्याहू अमेरिका-ईरान समझौता और लेबनान में इजरायली बलों की कार्रवाई की स्वतंत्रता को लेकर बढ़ते मतभेदों पर बात करना चाहते हैं। नेतन्याहू पर देश का दबाव है।