रायपुर 21दिसंबर 2025/ ETrendingIndia / ऑटोफैगी नई खोज से इलाज को नई दिशा
भारतीय वैज्ञानिकों ने ऑटोफैगी नई खोज के ज़रिए कोशिकाओं की एक अहम प्रक्रिया को समझा है।
यह खोज अल्जाइमर, पार्किंसन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद कर सकती है।
यह अध्ययन बेंगलुरु स्थित जेएनसीएएसआर के वैज्ञानिकों ने किया है।
क्या है ऑटोफैगी और क्यों है ज़रूरी
ऑटोफैगी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें कोशिकाएँ अपने खराब हिस्सों को साफ करती हैं।
लेकिन जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तब कोशिकाएँ बीमार हो जाती हैं।
इस कारण न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों का खतरा बढ़ता है, जैसे अल्जाइमर और हंटिंगटन।
कैंसर में ऑटोफैगी की दोहरी भूमिका
ऑटोफैगी नई खोज से यह भी पता चला है कि कैंसर में इसकी भूमिका जटिल है।
पहले यह कैंसर को रोकती है, लेकिन बाद में ट्यूमर को जीवित रहने में मदद करती है।
हालांकि, सही नियंत्रण से यह इलाज का प्रभावी हथियार बन सकती है।
एक्सोसिस्ट कॉम्प्लेक्स की अहम भूमिका
वैज्ञानिकों ने एक्सोसिस्ट नामक प्रोटीन समूह की नई भूमिका पहचानी है।
यह समूह कोशिकाओं में “कचरा बैग” यानी ऑटोफैगोज़ोम बनाने में मदद करता है।
जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तब कोशिकाओं की सफाई रुक जाती है।
भविष्य के इलाज के लिए क्यों अहम है यह खोज
अंत में, ऑटोफैगी नई खोज से कोशिकाओं का संतुलन बहाल करने के रास्ते खुलते हैं।
यह शोध पीएनएएस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
इस प्रकार, यह खोज भविष्य में प्रभावी थैरेपी विकसित करने में निर्णायक साबित हो सकती है।
