Share This Article रायपुर, 18 मई 2026/ ETrendingIndia / Chhattisgarh’s invaluable heritage ‘Avalokiteshwar’ bronze statue: Then at the Sajgi Museum, rare statue being brought to India from the US / अवलोकितेश्वर कांस्य प्रतिमा , विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक बड़ी और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। रायपुर स्थित महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से चोरी हुई भगवान अवलोकितेश्वर की दुर्लभ कांस्य प्रतिमा छत्तीसगढ़ लौटने की तैयारी में है। लगभग 19 करोड़ रुपये मूल्य की यह ऐतिहासिक प्रतिमा अमेरिका से भारत लाई जा रही है और राज्य सरकार इसे फिर से रायपुर स्थित संग्रहालय में स्थापित करने की दिशा में सक्रिय पहल कर रही है। पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर प्रतिमा को छत्तीसगढ़ वापस भेजने का आग्रह किया है। जानकारी के अनुसार प्रतिमा अभी भारत नहीं पहुंची है, लेकिन उसके भारत आगमन के बाद राज्य शासन उसे रायपुर लाने और पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया को शीघ्र आगे बढ़ाएगा। संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल प्रतिमा की रिसीविंग के लिए दिल्ली जाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिका ने हाल के वर्षों में भारत को करीब 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य की 657 प्राचीन और ऐतिहासिक कलाकृतियां लौटाई हैं। इन्हीं बहुमूल्य धरोहरों में महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से चोरी हुई ‘अवलोकितेश्वर’ की यह दुर्लभ कांस्य प्रतिमा भी शामिल है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और चोरी हुई भारतीय धरोहरों की वापसी की दिशा में इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सिरपुर की गौरवशाली विरासत की प्रतीक है प्रतिमा यह प्रतिमा वर्ष 1939 में महासमुंद जिले के विश्वविख्यात पुरातात्विक स्थल सिरपुर स्थित लक्ष्मण मंदिर परिसर के पास मिली थी। यह उस क्षेत्र में प्राप्त कांस्य प्रतिमाओं के एक बड़े भंडार का हिस्सा थी। बाद में इसे सुरक्षित संरक्षण के लिए रायपुर स्थित महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में रखा गया था, लेकिन प्रतिमा चोरी हो गई और बाद में यह प्रतिमा अमेरिका पहुंच गई। इतिहासकारों के अनुसार प्रतिमा पर अंकित शिलालेख में ‘द्रौणग्रिदत्त’ नाम का उल्लेख मिलता है, जो प्राचीन श्रीपुर, वर्तमान सिरपुर, का निवासी था। इससे इस प्रतिमा का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। अवलोकितेश्वर की यह कांस्य प्रतिमा छत्तीसगढ़ की समृद्ध बौद्ध परंपरा, प्राचीन शिल्पकला और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत प्रतीक है। सिरपुर, जो प्राचीन काल में बौद्ध संस्कृति, स्थापत्य और कला का प्रमुख केंद्र रहा है, वहां से प्राप्त यह प्रतिमा प्रदेश की ऐतिहासिक समृद्धि का महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जाती है। राज्य सरकार ने शुरू की औपचारिक पहल संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि यह प्रतिमा केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की ऐतिहासिक और बौद्ध विरासत की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि संस्कृति मंत्रालय एवं संबंधित एजेंसियों के माध्यम से सभी प्रशासनिक और औपचारिक प्रक्रियाएं शीघ्र पूरी कर प्रतिमा को छत्तीसगढ़ शासन को सौंपा जाए, ताकि इसे महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में सुरक्षित रूप से संरक्षित कर आमजन, शोधार्थियों और इतिहास प्रेमियों के अवलोकन हेतु उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने कहा कि विदेश पहुंच चुकी यह ऐतिहासिक धरोहर अब पुनः भारत लौट रही है, जो सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। Share This Article Post navigation अबूझमाड़ का सोमरू राम : सुशासन शिविर में ‘एक ही दिन’ में बना आधार कार्ड बिना बैंड-बाजा और लाखों खर्च के रचा विवाह, रायकोना के जोड़े ने पेश की मिसाल