रायपुर 19 मई 2026 / ETrendingIndia / Raikona couple set an example of marriage without band-baja and spending millions / सादगीपूर्ण कोर्ट मैरिज , जहां आज शादी मतलब दिखावा, भारी खर्च और चमक-दमक माना जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ के छोटे से गांव रायकोना के एक युवक-युवती ने सादगी, सहमति और संस्कारों से ऐसा विवाह रचाया जिसने समाज को नई सोच का संदेश दे दिया।
ग्राम रायकोना के रघुनाथ साहू और योगेश्वरी साहू ने विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत कलेक्टर कोर्ट में अपने माता-पिता की मौजूदगी और रजामंदी से बेहद सादगीपूर्ण तरीके से विवाह कर एक मिसाल कायम की।
न्यायालय कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सह विवाह अधिकारी कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के समक्ष दोनों ने वैधानिक प्रक्रिया पूरी करते हुए जीवनभर साथ निभाने की शपथ ली।
इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि वर-वधु दोनों एक ही जाति से हैं और दोनों परिवारों की पूरी सहमति के साथ यह विवाह सम्पन्न हुआ।
आमतौर पर कोर्ट मैरिज को अंतरजातीय या पारिवारिक विरोध से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन रायकोना के इस परिवार ने बिना किसी विवाद, तामझाम और फिजूलखर्ची के गरिमापूर्ण विवाह कर समाज के सामने नई सोच पेश की।
विवाह के दौरान परिवार के भाई-बहन, महिलाएं और दोनों पक्षों के सदस्य मौजूद रहे।
सादगी भरे माहौल में वर-वधु ने एक-दूसरे को माला पहनाई, अंगूठियों का आदान-प्रदान किया, वर ने वधु को मंगलसूत्र पहनाया और मांग में सिंदूर भरकर विवाह की रस्म पूरी की। इसके बाद सभी उपस्थित लोगों को मिठाई खिलाकर खुशी साझा की गई।
रघुनाथ साहू और योगेश्वरी साहू दोनों की उम्र 25-26 वर्ष बताई गई है। इस विवाह ने यह साबित कर दिया कि शादी की असली खूबसूरती दिखावे में नहीं बल्कि आपसी सम्मान, सहमति और परिवार के आशीर्वाद में होती है।
लोगों के बीच इस सादगीपूर्ण विवाह की चर्चा लगातार हो रही है और इसे फिजूलखर्ची रोकने की प्रेरणादायक पहल माना जा रहा है।
बहरहाल, रायकोना का यह विवाह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं बल्कि समाज को यह संदेश भी है कि रिश्तों की मजबूती करोड़ों के खर्च से नहीं, बल्कि विश्वास और संस्कारों से बनती है।
