Collector Class: When the Collector took charge of the blackboard... taught physics... and had a heartwarming interaction with the children... Watch the video here.
Collector Class
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रायपुर, 07 अगस्त 2026/ Collector Class : जिले के दूरस्थ पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम लमना स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में उस समय अलग ही माहौल देखने को मिला, जब कलेक्टर कुणाल दुदावत अचानक विद्यार्थियों के बीच पहुंच गए। औपचारिक निरीक्षण करने के बजाय वे सीधे बच्चों के साथ बैठ गए और आत्मीय अंदाज में बातचीत शुरू की।

उन्होंने छात्रों से पूछा, ‘बताइए… स्कूल में क्या कमी है? क्या समस्या है? संकोच मत कीजिए।’ शुरुआत में छात्राएं झिझकीं, लेकिन कुछ ही देर में माहौल सहज हो गया। कलेक्टर ने मुस्कुराते हुए पूछा, ‘मुझे पहचानते हो?’ इसके बाद बच्चों ने खुलकर अपनी समस्याएं और जरूरतें बताईं।

पहले खुद गिनाईं स्कूल की जरूरी सुविधाएं

बच्चों के बताने से पहले ही कलेक्टर ने कहा कि एक आदर्श विद्यालय में पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशाला, खेल मैदान, खेल सामग्री, बेहतर रोशनी, स्वच्छ शौचालय और अच्छा शैक्षणिक वातावरण होना चाहिए। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को इन सुविधाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बच्चों के सपनों को मिली नई दिशा

कलेक्टर ने विद्यार्थियों से उनके भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने पूछा कि वे आगे क्या बनना चाहते हैं और 12वीं के बाद पढ़ाई जारी रखेंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि आर्थिक अभाव किसी प्रतिभा की राह नहीं रोक सकता। जिला प्रशासन डीएमएफ की शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से उच्च शिक्षा में सहयोग और NEET-JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क कोचिंग उपलब्ध करा रहा है।

100% रिजल्ट पर मिलेगा ISRO जाने का मौका

विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए कलेक्टर ने घोषणा की कि जिन विद्यालयों का बोर्ड परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहेगा और विद्यार्थी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे, उन्हें जिला प्रशासन ISRO (स्पेस सेंटर) के शैक्षणिक भ्रमण पर भेजेगा, ताकि वे बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा ले सकें।

कलेक्टर ने पढ़ाया फिजिक्स का पाठ

दौरे के दौरान कलेक्टर शिक्षक की भूमिका में भी नजर आए। उन्होंने कक्षा 11वीं के विद्यार्थियों को भौतिक विज्ञान पढ़ाया। उन्होंने भौतिक मात्रक, सदिश-अदिश राशियां, चाल, समय, दूरी और विस्थापन जैसे विषयों को सरल और व्यवहारिक उदाहरणों के साथ समझाया। विद्यार्थियों ने भी उत्साह से सवाल पूछे और कलेक्टर ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

यह दौरा केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि इस संदेश का उदाहरण बना कि प्रशासन केवल भवन नहीं बनाता, बल्कि बच्चों के सपनों को भी आकार देने का प्रयास करता है।