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रायपुर, 3 मई 2026 / ETrendingIndia / कॉर्पोरेट वर्क कल्चर: देर रात काम करने वालों को मिलती है ज्यादा पहचान

भारत के कॉर्पोरेट वर्क कल्चर को लेकर एक आईटी प्रोफेशनल की पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। 13 साल से आईटी सेक्टर में काम कर रहे कर्मचारी ने दावा किया कि कंपनियों में देर रात तक ऑनलाइन रहने और 11 बजे ईमेल भेजने वाले कर्मचारियों को ज्यादा पहचान मिलती है।

उन्होंने बताया कि कई कंपनियों में काम करने के बाद भी उन्हें लगभग हर जगह एक जैसी स्थिति देखने को मिली। उनके अनुसार, जो कर्मचारी 12 से 14 घंटे तक काम करते हैं, उन्हें मैनेजमेंट ज्यादा समर्पित मानता है।

परिवार और नौकरी के बीच बढ़ती चुनौती

आईटी प्रोफेशनल ने कहा कि शादी और पिता बनने के बाद उनकी प्राथमिकताएं बदल गईं। अब वे शाम और वीकेंड परिवार के साथ बिताना पसंद करते हैं। हालांकि, इसके कारण उन्हें लगता है कि कॉर्पोरेट वर्क कल्चर में उनकी प्रतिबद्धता को कम आंका जाता है।

उन्होंने बताया कि वे सामान्य समय पर लॉग ऑफ कर देते हैं, जबकि कई सहकर्मी देर रात तक उपलब्ध रहते हैं। इसी कारण वरिष्ठ प्रबंधन उन्हें ज्यादा सक्रिय और समर्पित मानता है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

यह पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने कहा कि भारत के कॉर्पोरेट वर्क कल्चर में “हमेशा उपलब्ध रहने” की मानसिकता तेजी से बढ़ रही है।

वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि कर्मचारियों के निजी जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए। कई लोगों ने वर्क-लाइफ बैलेंस को आज की सबसे बड़ी जरूरत बताया।

कर्मचारियों के लिए बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार लंबे समय तक काम करने से तनाव और मानसिक दबाव बढ़ सकता है। इसलिए कंपनियों को बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस की दिशा में कदम उठाने चाहिए।