Share This Article रायपुर, 29 जुलाई / ETrendingIndia / पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल कच्चे तेल की कीमतें पश्चिम एशिया में ताजा सैन्य घटनाओं के बाद 6% से अधिक बढ़ गई हैं। अमेरिका और सऊदी अरब द्वारा इराक में किए गए हमलों तथा जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ गया है। इस कारण वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है। बुधवार शाम ब्रेंट क्रूड का सितंबर वायदा भाव लगभग 89.44 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 6.36% अधिक रहा। भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है असर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ना भारत के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है, क्योंकि देश अपनी लगभग 90% तेल आवश्यकता आयात से पूरी करता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमत में एक डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि पूरे वर्ष बनी रहती है, तो भारत का आयात बिल लगभग ₹18,000 करोड़ तक बढ़ सकता है। इसलिए सरकार और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियां अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। रूस से तेल आयात जारी रहने की संभावना हालांकि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारतीय रिफाइनरियां निकट भविष्य में रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रख सकती हैं। रूस फिलहाल भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। दूसरी ओर अमेरिकी सीनेट ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर अतिरिक्त प्रतिबंध और शुल्क लगाने संबंधी विधेयक को आगे बढ़ाया है। इससे भविष्य में व्यापारिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। वैश्विक तनाव के बीच बाजार की बढ़ी चिंता अंत में कच्चे तेल की कीमतें आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति पर निर्भर रहेंगी। यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर भारत की अर्थव्यवस्था, ईंधन लागत और महंगाई पर भी पड़ सकता है। Share This Article Post navigation NEET Protest Case: चार महीने से रूस में होने का दावा, फिर भी प्रदर्शन मामले में नाम दर्ज होने पर युवक ने उठाए सवाल Oil Price Shock : 6% उछला कच्चा तेल…! भारत पर महंगाई का नया खतरा…रूस से तेल खरीद पर भी संकट…?