रायपुर, 30 जुलाई। Oil Price Shock : पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में भूचाल ला दिया है। अमेरिका और सऊदी अरब की ओर से इराक में नए हमलों तथा जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 6% से ज्यादा की उछाल दर्ज की गई। इसके साथ ही भारत के लिए एक और चिंता बढ़ गई है, क्योंकि अमेरिका में ऐसा बिल आगे बढ़ा है जो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता खोल सकता है।
ब्रेंट क्रूड पहुंचा 89 डॉलर के पार
बुधवार शाम इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर सितंबर ब्रेंट कॉन्ट्रैक्ट 89.44 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा, जो पिछले बंद भाव से 6.36% अधिक है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 90% आयात करता है। इनमें 50% से अधिक हिस्सा रूस से आने वाले तेल का है। ऐसे में यदि अमेरिका का प्रस्तावित प्रतिबंध लागू होता है, तो भारत के लिए ऊर्जा आयात महंगा हो सकता है।
अमेरिका के बिल में क्या है?
अमेरिकी सीनेट में आगे बढ़ाए गए प्रस्ताव के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100% तक टैरिफ और कड़े प्रतिबंध लगाने का अधिकार मिल सकता है। इस सूची में भारत और चीन जैसे देश भी शामिल हैं।
फिलहाल रूस से तेल खरीद जारी रहेगी
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारतीय रिफाइनर फिलहाल उन रूसी कंपनियों से तेल खरीद रहे हैं जिन पर प्रतिबंध नहीं हैं। इसलिए निकट भविष्य में रूस से तेल आयात जारी रहने की संभावना है, हालांकि अमेरिका के फैसले पर सभी की नजर बनी हुई है।
महंगाई पर बढ़ सकता है दबाव
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी एक साल तक बनी रहती है, तो भारत का तेल आयात बिल करीब ₹18,000 करोड़ तक बढ़ सकता है। इसका असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन, खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की महंगाई पर भी पड़ सकता है।
भारत का बढ़ता आयात बिल
- जुलाई में रूस से आयात: करीब 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन
- अप्रैल-जून तेल आयात बिल: 49.8 बिलियन डॉलर
- पिछले वर्ष की तुलना में 61% की वृद्धि
- भारतीय क्रूड बास्केट (28 जुलाई): 84.26 डॉलर प्रति बैरल
IEA ने भी जताई चिंता
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की जुलाई रिपोर्ट के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है तो 2026 में वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हालांकि हालात सामान्य होने पर अगले वर्ष सप्लाई में सुधार की संभावना भी जताई गई है।
