रायपुर, 28 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में दुर्लभ बुंडीबुग्यो (Bundibugyo) इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार संक्रमितों की संख्या 3,200 से अधिक हो चुकी है और 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच इस दुर्लभ वायरस के खिलाफ पहला मानव वैक्सीन ट्रायल शुरू होने से राहत की उम्मीद जगी है।
तीसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप
WHO के अनुसार मई 2026 में शुरू हुआ यह प्रकोप अब तक के सबसे बड़े इबोला प्रकोपों में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। संक्रमण अब कांगो के पांच प्रांतों तक फैल चुका है और पड़ोसी युगांडा में भी मामले सामने आए हैं।
पहली बार इंसानों पर वैक्सीन का परीक्षण
बुंडीबुग्यो इबोला के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वैज्ञानिकों ने पहली बार इस वायरस के खिलाफ मानव वैक्सीन परीक्षण शुरू किया है, जिससे भविष्य में महामारी पर नियंत्रण की उम्मीद बढ़ी है।
क्यों है यह वायरस ज्यादा खतरनाक ?
विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों जैसे जंगली जीवों से इंसानों तक पहुंचता है। संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों के संपर्क से यह तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है।
लक्षण फ्लू जैसे, लेकिन खतरा गंभीर
संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर उल्टी, दस्त, अंगों की विफलता और गंभीर मामलों में मृत्यु तक हो सकती है। सभी मरीजों में रक्तस्राव होना जरूरी नहीं है।
राहत कार्यों में कई चुनौतियां
स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल, दूर-दराज़ क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाई और सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण राहत अभियान प्रभावित हो रहा है।
WHO का मानना है कि संक्रमण को पूरी तरह नियंत्रित होने में अभी कई महीने लग सकते हैं।
