Youth Dialogue: Students' voices resonate in Prayagraj...! Rahul Gandhi raises issues regarding employment, paper leaks, and youth movements.Youth Dialog
Share This Article

रायपुर, 22 जुलाई 2026/ Education System: Rahul Gandhi targets the government at a press conference…! Demands Dharmendra Pradhan’s removal.

Education System : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने देश में लगातार हो रहे पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कमियों को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और सड़कों पर उतरे छात्रों का पूरा समर्थन करने का ऐलान किया।

राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने भारत की सबसे बड़ी संपत्ति यानी हमारे युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश का एजुकेशन सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है और वह प्रदर्शन कर रहे छात्रों की तीनों मांगों का 100% समर्थन करते हैं।

राहुल गांधी द्वारा सरकार के सामने रखी गई 3 मुख्य मांगें

शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: धर्मेंद्र प्रधान, जो बतौर शिक्षा मंत्री पूरी तरह नाकाम रहे हैं और जिन पर कई आरोप हैं, उन्हें पद से तुरंत हटाया जाए। राहुल ने कहा कि वह इस व्यवस्था को चलाने में असमर्थ हैं।

कड़ी जवाबदेही और कार्रवाई: जिन लोगों ने मासूम छात्रों पर उंगलियां उठाईं, चाहे आदेश देने वाले अधिकारी हों या उसे अंजाम देने वाले, उन सभी को तुरंत जवाबदेह ठहराया जाए।

छात्रों से सार्वजनिक माफी: इस सिस्टम को चलाने वाले ज़िम्मेदार व्यक्तियों में इतनी शालीनता होनी चाहिए कि वे मानसिक तनाव झेल रहे देश के छात्रों से हाथ जोड़कर माफी मांगें।

‘शिक्षा बजट के बराबर NEET छात्रों के परिवारों से लूट’

आंकड़ों का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत सरकार का पूरा शिक्षा बजट ₹1.4 लाख करोड़ का है, जबकि हर साल NEET की परीक्षा देने वाले परिवारों का कुल खर्च ₹1.32 लाख करोड़ बैठता है। राहुल गांधी ने कहा- यह आम और गरीब परिवारों से सीधी लूट है। मेहनत की गाढ़ी कमाई ऐंठने के बाद बच्चों को बता दिया जाता है कि पेपर लीक हो गया है। यह व्यवस्था अब पूरी तरह से धांधली वाली बन चुकी है।

’10 साल में 152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ परिवार प्रभावित’

राहुल गांधी ने दावा किया कि पिछले एक दशक में 152 बार पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिसका मतलब है कि औसतन हर महीने एक पेपर लीक हुआ है। इससे देश के 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि परीक्षाओं के अनिश्चित तनाव के कारण कई मासूम बच्चों ने आत्महत्या तक कर ली है, लेकिन इसके बावजूद किसी भी बड़े दोषी को सजा नहीं मिली।


Share This Article