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 रायपुर, 05 नवंबर 2026 / ETrendingIndia / फ्रांस में रक्त के नमूनों को सुरक्षित रखने वाली शीत भंडारण सुविधाओं पर साइबर हमला होने का मामला सामने आया है। हैकरों ने इन इकाइयों की तापमान नियंत्रण प्रणाली में सेंध लगाकर तापमान 110 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ाने की कोशिश की। इन सुविधाओं का संचालन फ्रांस की राष्ट्रीय रक्त सेवा करती है। हमले के कारण बड़ी संख्या में रक्त के नमूनों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई थी। हालांकि, समय रहते हमले का पता चल जाने से बड़ा नुकसान टल गया।

रिपोर्ट के अनुसार, यह साइबर हमला रविवार और सोमवार की दरमियानी रात को किया गया। हैकरों ने कूलवर्ल्ड नामक कंपनी को निशाना बनाया, जो फ्रांस के रक्त प्रतिष्ठान (ईएफएस) के लिए भंडारण कंटेनरों की देखरेख करती है। इन सुविधाओं में बोर्गोग्ने-फ्रैंच-कॉम्टे क्षेत्र की इकाइयां भी शामिल हैं।


दरअसल, इन शीत भंडारण इकाइयों में रक्त के नमूनों को सुरक्षित रखने के लिए तापमानसामान्यत: शून्य से 30 डिग्री सेल्सियस नीचे रखा जाता है। इससे नमूने लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और खराब होने से बचते हैं। हैकरों ने इन इकाइयों की तापमान नियंत्रण व्यवस्था में बदलाव कर तापमान तेजी से बढ़ाकर 110 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचाने का प्रयास किया था।


फ्रांस के रक्त प्रतिष्ठान के मुताबिक, रात की पाली में ड्यूटी पर तैनात एक तकनीशियन ने भंडारण इकाइयों का तापमान असामान्य रूप से बढ़ते हुए देखा। इसके बाद तत्काल कार्रवाई की गई और साइबर हमले का पता चल गया। तकनीशियन की सतर्कता के कारण रक्त के नमूनों को संभावित नुकसान से बचाने में सफलता मिली।

फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस साइबर हमले का संस्थान के कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। रक्त प्रतिष्ठान ने शुरुआत में बताया था कि प्रभावित नमूने रक्त चढ़ाने से संबंधित स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था के तहत सुरक्षित रखे गए थे। इस व्यवस्था में मरीजों को रक्त चढ़ाए जाने के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखने के लिए नमूनों का संरक्षण किया जाता है। जरूरत पडऩे पर इनका इस्तेमाल विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी जांच और निगरानी के लिए किया जाता है।

यूरोप के कई देशों में इससे पहले भी साइबर हमलावरों ने शीतलन और प्रशीतन प्रणालियों को निशाना बनाया है। स्वीडन में कुछ दुकानों के प्रशीतक और हिमकारी यंत्रों का तापमान बढऩे से खाद्य सामग्री खराब हो गई थी। एस्टोनिया में भी ऐसी ही कोशिश को समय रहते पकड़ लिया गया था।


इसके अलावा आयरलैंड, बेल्जियम और लक्जमबर्ग में भी सुपर बाजारों की शीतलन व्यवस्था प्रभावित होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि साइबर हमले अब केवल कंप्यूटर और सूचना तंत्र तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य भंडारण और अन्य आवश्यक सुविधाओं के संचालन को भी प्रभावित कर सकते हैं। फ्रांस की घटना ने महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की साइबर सुरक्षा मजबूत करने की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है।


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