Share This Article रायपुर , 02अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / दुनिया के कई शहरों में जरूरत से ज्यादा भूजल निकालने के कारण जमीन धीरे-धीरे धंस रही है। इससे खासकर तटीय शहरों में समुद्र के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। नए अध्ययन से पता चला है कि भूजल भंडारों को फिर से भरने और पानी का अत्यधिक दोहन रोकने से जमीन के धंसने की प्रक्रिया को धीमा या कुछ स्थानों पर उलटा भी किया जा सकता है। ओसाका से मिला अहम सबूत जापान के ओसाका में लंबे समय तक भूजल निकालने से जमीन दो मीटर से अधिक धंस गई थी। 1960 के दशक में भूजल निकासी पर नियंत्रण के बाद जलस्तर में सुधार हुआ और अब कई क्षेत्रों में जमीन ऊपर उठ रही है। अध्ययन में कुछ जगह 12 मिलीमीटर प्रति वर्ष तक भू-उत्थान दर्ज किया गया। फॉल्ट लाइन भी डालती हैं असर शोधकर्ताओं ने पाया कि जमीन के ऊपर उठने की गति हर जगह समान नहीं है। भूमिगत फॉल्ट लाइनें पानी के प्रवाह को रोकने वाली बाधा की तरह काम कर सकती हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में भूजल तेजी से जमा होता है और जमीन भी अपेक्षाकृत तेजी से ऊपर उठती है। भारत में भी दिख रहे संकेत भारत में भी भूजल प्रबंधन से जमीन के धंसने की गति में कमी के संकेत मिले हैं। दिल्ली के द्वारका क्षेत्र में अध्ययन के अनुसार 2016 के बाद धंसाव रुका और बाद में जमीन ऊपर उठने लगी। समाधान क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार भूजल दोहन कम करना, वर्षाजल संचयन बढ़ाना और एक्विफर रिचार्ज जैसे उपाय शहरों को भूजल संकट और जमीन धंसने के जोखिम से बचाने में मदद कर सकते हैं। Share This Article Post navigation नेतन्याहू ने इजरायली चुनाव से पहले दुश्मनों के हमलों की चेतावनी दी, कहा-पंगा मत लो विश्व सेरेब्रल पाल्सी दिवस: चुनौतियों के बीच संभावनाओं को पंख देने की जरूरत