रायपुर 23 जून 2026/ High Court Decision: Significant ruling by the Chhattisgarh High Court…! Guest lecturers will also receive paid maternity leave.
High Court Decision : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महिलाओं के मातृत्व अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 का लाभ केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। दैनिक वेतनभोगी, मस्टर रोल, संविदा कर्मी और कॉलेजों में कार्यरत अतिथि व्याख्याता भी सवेतन मातृत्व अवकाश पाने की पात्र हैं।
अतिथि व्याख्याता की याचिका पर फैसला
रायपुर की अतिथि व्याख्याता शिल्पी शुक्ला ने मातृत्व अवकाश अवधि का वेतन दिलाने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। वे नवंबर 2022 से शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ कॉलेज में कार्यरत हैं। उन्हें 13 सितंबर 2025 से मातृत्व अवकाश स्वीकृत हुआ था और 20 मार्च 2026 को उन्होंने पुनः कार्यभार ग्रहण किया।
विभाग ने लाभ देने से किया था इंकार
उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें अतिथि कर्मचारी बताते हुए मातृत्व अवकाश अवधि का वेतन देने से इंकार कर दिया था। राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि वे नियमित कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए वित्तीय लाभ की पात्र नहीं हैं।
मातृत्व लाभ सेवा श्रेणी पर निर्भर नहीं
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि मातृत्व लाभ एक मानवीय और वैधानिक अधिकार है। किसी महिला कर्मचारी को उसकी नियुक्ति की प्रकृति के आधार पर इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी पात्र महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश और उससे जुड़े लाभ समान रूप से दिए जाने चाहिए।
अन्य कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ
इस फैसले से प्रदेश में कार्यरत हजारों संविदा, दैनिक वेतनभोगी, मस्टर रोल कर्मियों और अतिथि व्याख्याताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। यह निर्णय कार्यस्थलों पर महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
