रायपुर, 13 जून 2026/ Historical Documents: An invaluable historical treasure discovered in Kabirdham…! 38 rare documents identified, including a 375-year-old palm-leaf manuscript.
Historical Documents : छत्तीसगढ़ का कबीरधाम जिला एक बार फिर अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को लेकर चर्चा में है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ के तहत जिले में 38 दुर्लभ और महत्वपूर्ण प्राचीन दस्तावेजों की पहचान की गई है। इनमें 375 वर्ष पुरानी तालपत्र पांडुलिपि, श्रीमद्भगवद्गीता की हस्तलिखित प्रति, गीत गोविंद, गजेंद्र मोक्ष और भोरमदेव-मड़वा महल से जुड़े ऐतिहासिक अभिलेख शामिल हैं।
कलेक्टर गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान ने मध्यभारत के इतिहास, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े कई अनमोल साक्ष्यों को सामने लाकर शोधकर्ताओं और इतिहासकारों का ध्यान आकर्षित किया है।
375 साल पुरानी पाक-कला की पांडुलिपि बनी आकर्षण का केंद्र
सर्वेक्षण में सबसे अनोखी खोज एक तालपत्र (पाम लीफ) पर लिखी लगभग 375 वर्ष पुरानी पांडुलिपि है। बंगाली भाषा में लिखी यह दुर्लभ पांडुलिपि प्राचीन पाक-कला और खानपान परंपराओं से जुड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दस्तावेज उस समय की जीवनशैली, भोजन संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत साबित होगा।
गीता, गीत गोविंद और गजेंद्र मोक्ष की दुर्लभ प्रतियां
अभियान के दौरान भारतीय भक्ति साहित्य और संस्कृत परंपरा से जुड़ी कई मूल्यवान पांडुलिपियां भी सामने आई हैं। इनमें सन 1839 की संस्कृत में लिखित ‘गीत गोविंद’, सन 1856 की हस्तलिखित ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ तथा ‘गजेंद्र मोक्ष’ की प्राचीन प्रतियां विशेष महत्व रखती हैं।
भोरमदेव और मड़वा महल के ऐतिहासिक अभिलेख मिले
सर्वेक्षण में क्षेत्रीय इतिहास को समझने वाले कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं। इनमें रामनगर (मंडला) शिलालेख का हिंदी अनुवाद, सन 1867 में किया गया भोरमदेव शिलालेख का अनुवाद और सन 1898 का मड़वा महल शिलालेख का पद्यात्मक अनुवाद शामिल है। इन दस्तावेजों से मध्यभारत के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास पर नई रोशनी पड़ने की उम्मीद है।
वैदिक ज्ञान और ब्रह्मांड विज्ञान की झलक
सर्वेक्षण में ब्रह्मांड विज्ञान, ज्योतिष, वैदिक चिंतन और तांत्रिक परंपराओं से जुड़ी कई दुर्लभ पोथियां भी सामने आई हैं। इनमें महामृत्युंजय स्रोत, संध्या विधि, तांत्रिक संध्या, श्राद्ध पद्धति और अन्य वैदिक अनुष्ठानों से संबंधित पांडुलिपियां शामिल हैं।
अब होगा डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक संरक्षण
ज्ञान भारतम् अभियान के तहत चिन्हित सभी 38 दस्तावेजों का डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक संरक्षण किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इन दस्तावेजों के अध्ययन से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, लोकजीवन, स्थापत्य कला और प्राचीन भारतीय विज्ञान के कई नए पहलुओं का खुलासा हो सकता है।
कलेक्टर की अपील
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास कोई प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ, वंशावली, पोथी या ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित हैं, तो वे ‘ज्ञान भारतम्’ ऐप के माध्यम से उनका पंजीयन कर राष्ट्रीय संरक्षण अभियान में भागीदार बनें।

