Share This Article रायपुर 25 नवम्बर 2025/ ETrendingIndia / दास्तां-ए-गुरुदत्त इफ्फी 2025 , भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) के पांचवें दिन गोवा की कला अकादमी में प्रसिद्ध फिल्म निर्माता गुरुदत्त को समर्पित विशेष संगीतमय प्रस्तुति ‘दास्तां-ए-गुरुदत्त’ का आयोजन हुआ। फौजिया और उनकी टीम की इस प्रस्तुति ने गुरुदत्त के जीवन, संघर्ष और उनकी कला यात्रा को बेहद सरल और प्रभावी तरीके से दर्शकों के सामने रखा। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ फिल्मकार राहुल रवैल ने गुरुदत्त के भारतीय सिनेमा में योगदान को याद करते हुए की। इसके बाद फौजिया ने अपनी प्रस्तुति के जरिए गुरुदत्त के जीवन के अलग-अलग पड़ावों की झलक दिखाई। गायिका लतिका जैन, तबला वादक सुदीप, हारमोनियम वादक ऋषभ और गिटारिस्ट अंकित ने संगीत से प्रस्तुति को और आकर्षक बनाया। इस कार्यक्रम का निर्देशन विकास जालान ने किया और शोध में आशा बत्रा का सहयोग रहा। कहानी की शुरुआत गुरुदत्त के कोलकाता में बिताए बचपन और उनके ननिहाल से मिले कला संस्कारों से हुई। अल्मोड़ा के उदय शंकर सांस्कृतिक केंद्र में मिली प्रशिक्षण ने उनके व्यक्तित्व को और निखारा। प्रस्तुति में गुरुदत्त और देव आनंद की गहरी दोस्ती का भी उल्लेख हुआ। प्रभात स्टूडियो, पुणे में शुरू हुई यह दोस्ती आगे चलकर नवकेतन फिल्म्स और फिल्म ‘बाजी’ का कारण बनी। इसी फिल्म से गुरुदत्त ने अपने करियर की धमाकेदार शुरुआत की और अभिनेता बदरुद्दीन काज़ी को प्रसिद्ध नाम जॉनी वॉकर दिया। कार्यक्रम में गुरुदत्त की क्लासिक फिल्में, खासकर ‘प्यासा’, और उनके निजी जीवन के संघर्षों पर भी रोशनी डाली गई। कागज के फूल की असफलता के बाद उनके जीवन में आए मानसिक तनाव को भी संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया गया। दर्शकों ने इस संगीतमय प्रस्तुति को बेहद पसंद किया। अंत में निर्माता रवि कोट्टारकरा ने टीम को सम्मानित करते हुए गुरुदत्त की विरासत को जीवित रखने के उनके प्रयासों की सराहना की। Share This Article Post navigation इफ्फी में संपादन की कला पर खास कार्यशाला : श्रीकर प्रसाद ने बताया—फिल्म की लय, ताल और भावनाओं का विज्ञान IFFI 2025 में दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को भावपूर्ण श्रद्धांजलि