Share This Article रायपुर 25 नवंबर 2025/ ETrendingIndia / इफ्फी में श्रीकर प्रसाद , 56वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) में प्रसिद्ध फिल्म संपादक श्रीकर प्रसाद ने “फ्रॉम माइंड टू स्क्रीन: विज़न टू एग्ज़िक्यूशन” नाम से एक विशेष एडिटिंग वर्कशॉप का संचालन किया। इस सत्र ने दर्शकों को यह समझाया कि एडिटिंग सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि कहानी की आत्मा को आकार देने की प्रक्रिया है। 18 भाषाओं में 650 से ज्यादा फिल्मों का संपादन कर चुके श्रीकर प्रसाद ने कहा कि एडिटिंग का आधार भावनाएँ होती हैं। हर कट इस बात से तय होता है कि दर्शक क्या महसूस करेंगे। उन्होंने बताया कि एक एडिटर के लिए सबसे जरूरी है कहानी को साफ और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना। कार्यक्रम की शुरुआत में रवि कोट्टारकरा ने श्रीकर प्रसाद का सम्मान किया और उनके इस गुण की सराहना की कि वे “क्या नहीं करना है” यह भली-भांति जानते हैं। प्रसाद ने कहा कि एडिटिंग की शुरुआत स्क्रिप्ट से होती है। अलग-अलग निर्देशकों के साथ काम करने से उनका नजरिया बदला और वे समझ पाए कि हर फिल्म नई चुनौती लेकर आती है। उन्होंने यह भी बताया कि एक संपादक का काम सिर्फ अच्छे दृश्यों को चुनना नहीं, बल्कि कई बार कमजोर दृश्यों को हटाकर कहानी को मजबूत बनाना भी होता है। समानांतर चल रही कहानियों और कई पात्रों वाले कथानक में भावनात्मक संतुलन बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। एआई पर हुई हल्की चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि मशीनें तकनीकी काम कर सकती हैं, पर इंसानी भावनाओं, लय और इंट्यूशन की जगह नहीं ले सकतीं। सत्र के अंत में उन्होंने कहा कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली कला है, और एडिटिंग वही जगह है जहाँ फिल्म अपना असली स्वरूप पाती है। इफ्फी के बारे में 1952 में शुरू हुआ भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) एशिया का प्रमुख फिल्म महोत्सव है। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, एनएफडीसी और गोवा सरकार द्वारा आयोजित यह मंच दुनिया भर की फिल्मों, फिल्मकारों और सृजनात्मकता का उत्सव है। 20–28 नवंबर तक आयोजित 56वां संस्करण भारतीय रचनात्मकता और वैश्विक सिनेमाई विविधता का भव्य प्रदर्शन है। Share This Article Post navigation छः दशकों का चमकता सितारा : धर्मेंद्र की अद्भुत फिल्मी यात्रा इफ्फी में ‘दास्तां-ए-गुरुदत्त’ ने संगीत और यादों से दर्शकों को मोहित किया