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रायपुर / ETrendingIndia / भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन वृद्धि ने बदली उद्योग की तस्वीर

भारत ने 2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के क्षेत्र में ₹11.3 लाख करोड़ का नया रिकॉर्ड बनाया। यह 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से छह गुना अधिक है। यह उपलब्धि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन वृद्धि की दिशा में एक दशक की नीतिगत और औद्योगिक प्रगति का परिणाम है। इस दौरान देश में 25 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं, जिससे यह क्षेत्र भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते उद्योगों में शामिल हो गया है।


‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ से बढ़ी रफ्तार

सरकार की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत नीतियों ने इस क्षेत्र में जबरदस्त तेजी लाई है। भारत का लक्ष्य 2030-31 तक $500 बिलियन का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम बनाना है। इससे भारत अब वैश्विक स्तर पर डिज़ाइन, मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात का अग्रणी केंद्र बनने की राह पर है।


मोबाइल निर्माण में भारत बना वैश्विक शक्ति केंद्र

भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स वृद्धि का सबसे बड़ा हिस्सा मोबाइल निर्माण क्षेत्र से आया है।
2014-15 में भारत ने केवल ₹18,000 करोड़ मूल्य के मोबाइल बनाए थे, जबकि 2024-25 में यह बढ़कर ₹5.45 लाख करोड़ हो गया — 28 गुना वृद्धि
आज भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है, जो हर साल लगभग 33 करोड़ फोन बनाता है।
निर्यात भी 2014 के ₹1,500 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹2 लाख करोड़ हो गया।
सिर्फ Apple ने 2024 में भारत से ₹1,10,989 करोड़ मूल्य के iPhone निर्यात किए।


विदेशी निवेश और निर्यात में नई ऊंचाई

पिछले दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में USD 4 बिलियन से अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया। इनमें से लगभग 70% निवेश Production Linked Incentive (PLI) Scheme से जुड़े हैं।
2024-25 में भारत के प्रमुख निर्यात गंतव्य रहे — अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और इटली।
वर्ष 2025-26 के शुरुआती पाँच महीनों में ही स्मार्टफोन निर्यात ₹1 लाख करोड़ पार कर गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 55% अधिक है।


नई योजनाओं ने दी मजबूती – PLI, SPECS और ECMS

सरकार की तीन प्रमुख योजनाएँ —

  1. PLI Scheme (₹1.97 लाख करोड़),
  2. SPECS Scheme (25% पूंजीगत प्रोत्साहन), और
  3. ECMS Scheme (₹22,919 करोड़ बजट) —
    ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन वृद्धि को नई दिशा दी है।
    इन योजनाओं से 1.35 लाख प्रत्यक्ष नौकरियाँ बनीं, ₹13,107 करोड़ निवेश आकर्षित हुआ और ₹4.65 लाख करोड़ का निर्यात हुआ।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन वृद्धि से बढ़ी आत्मनिर्भरता

आज भारत इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में केवल उत्पादन नहीं, बल्कि डिज़ाइन, नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला में भी आत्मनिर्भर बन रहा है।
जहाँ पहले 78% मोबाइल उपकरण आयात होते थे, वहीं अब भारत लगभग पूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त कर चुका है।
इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल डिवाइस निर्माण में भी भारत लगातार प्रगति कर रहा है।


2030 तक 500 बिलियन डॉलर लक्ष्य की ओर

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2019 (NPE 2019) के तहत भारत ने 2025 तक $400 बिलियन और 2030 तक $500 बिलियन उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
सरकारी योजनाएँ, निजी निवेश और नवाचार की गति देखते हुए, यह लक्ष्य अब वास्तविकता बनता जा रहा है।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन वृद्धि न केवल आर्थिक विकास बल्कि डिजिटल सशक्तिकरण और औद्योगिक आधुनिकीकरण की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रही है।