Share This Article रायपुर, 04 नवंबर 2026 / ETrendingIndia / छत्तीसगढ़ के बस्तर में पर्यटन के नए अध्याय की शुरुआत हुई है। करीब तीन दशक तक नक्सली गतिविधियों के कारण पर्यटकों की पहुंच से दूर रहे इंद्रावती टाइगर रिजर्व के जंगल अब सैलानियों के लिए खुल गए हैं। 1 नवंबर को वन मंत्री केदार कश्यप ने जंगल सफारी का वर्चुअल शुभारंभ किया। पहले चरण में 9 किलोमीटर के सफारी मार्ग पर चार जिप्सियों से पर्यटकों को जंगल की सैर कराई जाएगी। इस पहल से बस्तर की प्राकृतिक विरासत को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते भी खुलेंगे। बाघ, तेंदुए और दुर्लभ वन्यजीवों का बसेरा करीब 2,799 वर्ग किलोमीटर में फैला इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्रफल के लिहाज से देश का चौथा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, गौर, भालू, सांभर, चीतल और जंगली कुत्तों के अलावा भारतीय तथा सफेद पीठ वाले गिद्ध जैसी दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। घने जंगल, विस्तृत घासभूमियां और नदी का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करेगा। 9 किलोमीटर सफारी, 2 हजार रुपये शुल्क पहले चरण में उल्लूर गांव से उंडलापर्ती तक लगभग 9 किलोमीटर का सफारी ट्रैक तैयार किया गया है। एक जिप्सी में अधिकतम छह पर्यटक बैठ सकेंगे। प्रति जिप्सी सफारी का शुल्क 2,000 रुपये निर्धारित किया गया है। सफारी का समय सुबह 6 बजे और दोपहर 3 बजे रहेगा। प्रत्येक जिप्सी के साथ प्रशिक्षित गाइड भी मौजूद रहेगा। छह स्थानीय युवाओं को मिला रोजगार सफारी संचालन के लिए छह स्थानीय युवाओं को गाइड और वाहन चालक के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। पर्यटकों के लिए जलपान गृह, पेयजल और बैठने की व्यवस्था भी की गई है। भविष्य में सफारी मार्ग का विस्तार मट्टीमरका तक करने की योजना है। बदलते बस्तर की नई पहचान यह पहल केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। इससे स्थानीय खानपान, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कभी सुरक्षा चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में जंगल सफारी की शुरुआत बस्तर में बदलते हालात और विकास की नई संभावनाओं का संकेत है। Share This Article Post navigation जयपुर को मिला वैश्विक सम्मान… नेशनल जियोग्राफिक की 25 पसंदीदा जगहों में शामिल फूलों की घाटी शीतकाल के लिए बंद…, इस बार पर्यटकों की संख्या ने तोड़े सभी रिकॉर्ड