ISRO Scientists' Resignations: Major decision regarding resignations at ISRO! Scientists associated with the Gaganyaan mission will no longer be able to leave their jobs easily.
ISRO Scientists Resignation
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रायपुर, 17 जुलाई 2026/ ISRO Scientists’ Resignations: Major decision regarding resignations at ISRO! Scientists associated with the Gaganyaan mission will no longer be able to leave their jobs easily.

ISRO Scientists Resignation : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों के लगातार बढ़ते इस्तीफों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस (DoS) ने गगनयान मिशन और अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) और इस्तीफे को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं।

14 जुलाई को जारी मेमोरेंडम के मुताबिक, अब गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में कार्यरत ग्रुप ‘A’ के वैज्ञानिकों के इस्तीफे या VRS को सामान्य तौर पर मंजूरी नहीं दी जाएगी। ऐसे सभी मामलों की अंतिम समीक्षा और निर्णय डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस करेगा।

100 से ज्यादा वैज्ञानिकों के जाने से बढ़ी चिंता

सरकारी दस्तावेज के अनुसार, हाल के महीनों में 100 से अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारी ISRO छोड़ चुके हैं, जिससे गगनयान समेत कई अहम मिशनों की प्रगति प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। सबसे अधिक इस्तीफे UR Rao Satellite Centre (URSC) और Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC) से सामने आए हैं।

सेंटर डायरेक्टर अब नहीं ले सकेंगे अंतिम फैसला

नए आदेश के तहत वैज्ञानिक/इंजीनियर स्तर तक के सभी इस्तीफे और VRS आवेदन संबंधित सेंटर डायरेक्टर की स्पष्ट सिफारिश के साथ डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस को भेजे जाएंगे। अंतिम मंजूरी वहीं से मिलेगी। इससे पहले 2020 के आदेश के तहत सेंटर डायरेक्टरों को ही यह अधिकार प्राप्त था।

प्राइवेट स्पेस सेक्टर की ओर बढ़ रहे वैज्ञानिक

विशेषज्ञों का मानना है कि 2020 में स्पेस सेक्टर में निजी भागीदारी की अनुमति और 2023 की Indian Space Policy के बाद कई अनुभवी वैज्ञानिक निजी स्पेस कंपनियों का रुख कर रहे हैं। भारत में अब 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिन्होंने कुल मिलाकर लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित किया है।

मिशनों की चुनौतियों के बीच बड़ा फैसला

यह निर्णय ऐसे समय आया है जब ISRO को हाल के महीनों में PSLV के लगातार दो मिशनों में तकनीकी असफलताओं का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद एजेंसी गगनयान, चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) और मंगलयान-2 जैसे महत्वाकांक्षी मिशनों पर तेजी से काम कर रही है।