Gaurela-Pendra-Marwahi
Gaurela-Pendra-Marwahi
Share This Article

रायपुर, 22 जून 2026 / ETrendingIndia / The aroma of the organic Vishnubhog rice of Gaurela-Pendra-Marwahi has reached the capital city, Raipur. गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा जैविक विष्णुभोग चावल अब राज्य स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव को जिले का प्रसिद्ध जैविक विष्णुभोग चावल भेंट किया।

यह चावल अरपा बिहान महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा जैविक विधि से तैयार किया गया है।

स्थानीय स्तर पर पारंपरिक एवं विशिष्ट कृषि उत्पादों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विष्णुभोग धान का जैविक उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि ये उत्पाद न केवल गुणवत्ता और शुद्धता के लिए पहचान बना रहे हैं, बल्कि स्थानीय कृषि परंपराओं को भी संरक्षित करने का कार्य कर रहे हैं।

इन उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे बाजार में उनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने महिला स्व-सहायता समूहों की इस पहल की सराहना की.

छत्तीसगढ़ का पारंपरिक और सुगंधित धान

विष्णु भोग चावल छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध पारंपरिक और सुगंधित धान (चावल) की किस्म है। इसे अपनी विशेष खुशबू, स्वाद और मुलायम बनावट के लिए जाना जाता है। यह मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के मैदानी क्षेत्रों में उगाई जाती है और स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है।

प्रमुख विशेषताएँ

पकने पर मनमोहक सुगंध आती है।
दाने अपेक्षाकृत छोटे और आकर्षक होते हैं।

स्वादिष्ट होने के कारण विशेष अवसरों और पारंपरिक व्यंजनों में उपयोग किया जाता है।

इसे छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धान विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

पोषण एवं उपयोग

इसमें कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में होता है, जो ऊर्जा का अच्छा स्रोत है। इसे सामान्य भोजन, पुलाव और पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों में उपयोग किया जाता है। सुगंधित होने के कारण इसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है.