Major El Niño Warning: The most dangerous El Niño in 100 years! Heat records could be broken in 2027... A double whammy on India's monsoon and crops.Major El Niño Warning
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रायपुर, 22 अगस्त 2026/ Major El Niño Warning : धरती के सामने एक बड़े जलवायु संकट की आशंका बढ़ती नजर आ रही है। वैज्ञानिकों ने इस साल बनने वाले अल नीनो (El Niño) को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। ब्रिटेन के मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह अल नीनो एक सदी से ज्यादा समय में सबसे ताकतवर हो सकता है। इसका असर वैश्विक तापमान, बारिश और मौसम के पैटर्न पर पड़ने की आशंका है।

अगर मौजूदा अनुमान सही साबित होते हैं तो 2027 दुनिया का सबसे गर्म साल बन सकता है और 2024 का रिकॉर्ड भी पीछे छूट सकता है। भारत के लिए चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि मजबूत अल नीनो आम तौर पर कमजोर मानसून से जुड़ा माना जाता है।

प्रशांत महासागर का तापमान 3 डिग्री से ज्यादा बढ़ने का अनुमान

ब्रिटेन के मेट ऑफिस के मुताबिक, इस बार अल नीनो अपने चरम पर पहुंचने के दौरान प्रशांत महासागर के पानी को सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म कर सकता है। मेट ऑफिस के चीफ एडम स्केफ के मुताबिक, आधुनिक जलवायु रिकॉर्ड में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले नहीं देखी गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार 2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी भी एक बड़ी जलवायु घटना मानी जाती है। इससे पहले 2015-16 का अल नीनो सबसे शक्तिशाली घटनाओं में शामिल था, जब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से करीब 3 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया था।

नवंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो

NOAA के पूर्वानुमान मॉडल पर आधारित आंकड़ों के मुताबिक, इस बार अल नीनो का असर नवंबर में चरम पर पहुंच सकता है। इस दौरान प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से करीब 3.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है। फिलहाल भी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान 30 साल के औसत से करीब 2.6 डिग्री सेल्सियस ऊपर बताया जा रहा है। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि ये लंबी अवधि के जलवायु पूर्वानुमान हैं, इसलिए इन्हें सामान्य मौसम के छोटे अवधि वाले पूर्वानुमान की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

2027 में टूट सकता है गर्मी का रिकॉर्ड

अल नीनो का असर अक्सर इसके विकसित होने के अगले साल वैश्विक तापमान पर ज्यादा दिखाई देता है। इसी वजह से वैज्ञानिकों को 2027 में तापमान का नया वैश्विक रिकॉर्ड बनने की आशंका है। वैज्ञानिकों के मुताबिक 2027, 2024 को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे गर्म साल बन सकता है। 2024 में वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ऊपर पहुंच गया था।

भारत में कमजोर पड़ सकता है मानसून

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है। मजबूत अल नीनो आम तौर पर भारत में कमजोर मानसून से जुड़ा होता है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस साल देश में मानसून की बारिश लंबे समय के औसत की करीब 90 फीसदी रह सकती है। अगर अगले चरण में अल नीनो और मजबूत होता है तो भारत में बारिश का पैटर्न और प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि 2027 में भारत का औसत तापमान 2024 के रिकॉर्ड को पार करेगा या नहीं, यह उस समय के मानसून और ENSO परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसके बावजूद अगले साल भीषण गर्मी और हीटवेव का खतरा बना रह सकता है।

भारत पर डबल मार, दो फसल सीजन पर असर का खतरा

अल नीनो को लेकर भारत में सबसे बड़ी चिंता कृषि क्षेत्र की है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका असर केवल मानसून तक सीमित नहीं रह सकता।इस साल की रबी फसल पर गर्मी और मौसम में बदलाव का असर पड़ सकता है, जबकि 2027 की खरीफ फसल काफी हद तक मानसून पर निर्भर करेगी। अगर मानसून कमजोर रहा तो खरीफ उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

वहीं, अगले साल वसंत के दौरान ज्यादा गर्मी और हीटवेव की स्थिति बनी तो गेहूं जैसी फसलों समेत कई कृषि उत्पादों पर दबाव बढ़ सकता है।यानी भारत के सामने कम बारिश और ज्यादा गर्मी की दोहरी चुनौती खड़ी हो सकती है। इसका असर खेती, खाद्य उत्पादन और कुछ जरूरी कृषि जिंसों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।


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