रायपुर, 6 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / Current status of monsoon rains – Advice of agricultural scientists: In case of excessive rainfall, farmers should sow paddy using the Lehi (drum seeder/wet direct-seeding) method. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के
कृषि वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही वर्षा को देखते हुए किसान बन्धुओं को सलाह दी है कि खेतों में पर्याप्त पानी की उपलब्धता होने पर मचाई कर नर्सरी उपलब्ध होने पर रोपाई करें.
कृषि वैज्ञानिकों ने यह भी सलाह दी है कि नर्सरी की अनुपलब्धता पर लेही विधि से अंकुरित बीजों को मचाई किये हुए खेतों में ड्रम सीडर एवं छिटकवा विधि से बुवाई करें। नर्सरी एवं बीजों को कवकनाशी (कार्बेन्डाजिम) एवं जैव उर्वरकों से उपचारित कर रोपाई एवं बुवाई करें।
विश्वविद्यालय ने बताया कि छत्तीसगढ़ में बस्तर क्षेत्र के मार्ग से सामान्यतः 14 जून के आसपास मानसून वर्षा का आगमन होता है, किन्तु इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण बस्तर में लगभग 10 दिन विलंब से मानसून आया है।
वर्तमान में प्रदेश के समस्त कृषि जलवायु क्षेत्रों जैसे बस्तर का पठार, छत्तीसगढ़ का मैदान एवं छत्तीसगढ के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में मानसून पहुंच गया है।
8 जुलाई तक पूरे राज्य में व्यापक वर्षा होने के आसार
सामान्यतः जून के माह में छत्तीसगढ़ में लगभग 21 से.मी. वर्षा होती है, किन्तु इस वर्ष जून के माह में 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। आगामी 8 जुलाई तक पूरे राज्य में व्यापक वर्षा होने का आसार हैं।
मानसून का अब तक का कोटा लगभग पूरा
वर्तमान में बिलासपुर एवं सरगुजा संभाग को छोड़कर पूरे प्रदेश में लगभग सामान्य वर्षा दर्ज की गई है। विगत पांच दिनों में उपरोक्त दोनों संभागों को छोड़कर शेष क्षेत्रों में व्यापक वर्षा हुई है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि मानसून के देरी से आने के पश्चात् भी विगत 1 जुलाई से 6 जुलाई तक छत्तीसगढ का मैदानी भाग एवं बस्तर का पठार में अधिक वर्षा होने के कारण मानसून का अब तक का कोटा लगभग पूरा हो चुका है।
हरेली तक बुआई एवं रोपाई कर सकते हैं
विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस वर्ष अषाढ़ माह 1 जुलाई से प्रारंभ हुआ है। अषाढ़ माह से प्रारंभ होकर सावन मास की हरियाली अमावस्या अर्थात हरेली तिहार तक हम खरीफ फसल की बुआई एवं रोपाई कर सकते हैं।
इस बार हरेली 12 अगस्त को मनाई जाएगी, जो किसान भाई धान की सीधी बुआई करते हैं उन्हें परामर्श है कि जमीन में बतर की स्थिति में 15 जुलाई तक धान की बुआई कर लेवें।
रोपाई एवं बियासी पद्धति से धान की खेती करने वाले किसान भाई 30 जुलाई तक रोपाई एवं बियासी का कार्य कर लेवें।
किसी असामान्य परिस्थिति के कारण विलंब होने से यदि आप हरेली तक भी बुआई रोपाई का कार्य करते हंै तो फसल के उत्पादन में ज्यादा नुकसान नहीं होगा
धान की शीघ्र एवं मध्यम अवधि में पकने वाली प्रजातियाँ ले
चूंकि इस बार मानसून विलंब से आया है इसलिए किसान भाईयों को सलाह दी जाती है कि इस वर्ष धान की शीघ्र एवं मध्यम अवधि में पकने वाली प्रजातियाँ जो कि 125-130 दिन तक पक जाती है जैसे- इन्द्रावती धान, बस्तर धान-1, छत्तीसगढ़ बारानी धान, इंदिरा एरोबिक धान, एम.टी.यू. 1010, एम.टी.यू. 1153, एम.टी.यू. 1156, एम.टी.यू. 1001, विक्रम टी.सी.आर., छत्तीसगढ़ धान 1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान, महामाया आदि का उपयोग करें।
एक एकड़ में सीधी बुआई एवं बियासी के लिए 30 कि.ग्रा., रोपा पद्धति में 20 कि.ग्राम तथा हाइब्रिड प्रजाति के लिए 6 कि.ग्रा. बीज का उपयोग करें।
जल भराव तो लेही पद्धति से धान की बोआई करें
जिन खेतों में अधिक जल भराव हो गया है तथा वर्षा रुक नहीं रही हो तो लेही पद्धति से धान की बोआई करें। इस विधि में धान के अंकुरित बीजों की खेत में बुआई की जाती है
बुआई के पूर्व बीज को कार्बेन्डाजिम या किसी अन्य कवकनाशी दवा से उपचारित कर लें। 1 किलो बीज के लिए ढाई ग्राम दवा का प्रयोग करें।
भूमि में नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटेशियम की पूर्ति के लिए जैव उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए।
धान बीज को उपचारित करें
धान में एजोस्पाइरिलम, पी.एस.बी., के.एस.बी. का उपयोग करना चाहिए। इन तीनों तरल जैव उर्वरकों की 2-2 मि.ली. मात्रा अर्थात 6 मि.ली. तरल पदार्थ 4 मि.ली. पानी में मिला लें। इस प्रकार तैयार 10 मि.ली. के घोल से 1 कि.ग्रा. धान बीज को उपचारित कर दें। यह उपचार पौधों को लगभग 12 कि.ग्रा. नाइट्रोजन 8 कि.ग्रा. फास्फोरस एवं 5 कि.ग्रा. पोटेशियम प्रति एकड़ प्रदान करेगा।
वर्तमान परिपेक्ष्य में लगातार वर्षा की स्थिति में धान की लेही विधि से बुवाई- वर्तमान परिपेक्ष्य में उन क्षेत्रों में लगातार वर्षा की स्थिति निर्मित होने के कारण धान की लेही विधि से बुवाई करना उपयुक्त रहेगा।
इस हेतु धान के खेत में पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध होने पर खेत की रोपा पद्धति की ही तरह अच्छी तरह से मचाई कर अंकुरित बीजों को ड्रम सीडर अथवा छिटकवाॅं विधि से बुवाई करें।
अंकुरित बीजों को ड्रम सीडर यंत्र अथवा छिटकवाॅं विधि से बुुवाई करें
इस विधि में मध्यम अवधि में पकने वाली (120-130 दिन लगभग) उपयुक्त किस्मों (विक्रम टी.सी.आर., छत्तीसगढ़ धान 1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान, महामाया, एम.टी.यू. 1001) का चयन करें एवं इस हेतु बीज दर 40 किलों ग्राम प्रति एकड़ उपयोग करते हुए बीजों को 8-10 घंटे पानी में भिगोना चाहिए फिर इन भीगे हुए बीजों का पानी निथार दें, इसके बाद इन बीजों को पक्के फर्स पर रखकर बोरे से ठीक से ढ़क देना चाहिए। लगभग 24-30 घंटे में बीज अंकुरित हो जायेंगे। अब बोरे को हटाकर बीज को छाया में फैलाकर रखें एवं इन अंकुरित बीजों को ड्रम सीडर यंत्र उपलब्ध होने पर पंक्ति में बोवाई करें अथवा छिटकवाॅं विधि से बुुवाई करें।
खरपतवार नियंत्रण नहीं होने पर फसल में 50 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है
छत्तीसगढ़ में लगभग 26 लाख हेक्टेयर में धान की सीधी बुआई एवं 12 लाख हेक्टेयर में रोपाई की जाती है। सीधी बुआई में खरपतवार एक प्रमुख समस्या है एवं यदि इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल में 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
फसल बोने के 40 दिन बाद तक खेत को खरपतवार मुक्त रखना आवश्यक है। मानव श्रम उपलब्ध होने पर बोने के 20 दिन एवं 40 दिन बाद हाथ अथवा पैडी वीडर से निंदाई करना उचित होगा।
रासायनिक दवाई से भी संकरी पत्ती एवं चैड़ी पत्ती वाले खरपतवारो का प्रभावकारी निंदा नियंत्रण किया जा सकता है। इसके विकल्प निम्नानुसार है –
- अंकुरण पूर्व निंदानाशक (व्यवसायिक नाम- पेन्डीमेथीलीन स्टाम्प, पेंडीगोल्ड, पेंडीलीन, धानुटांप, पेनिडा, पेंडीहबे आदि की 1000 मि.ली. मात्रा) को 150 लीटर पानी में घोलकर एक एकड़ में बुआई के 0 से 3 दिन के बीच छिड़काव करें।
अथवा - पाइरेजोसल्फूरान (व्यवसायिक नाम- साथी, सेवक, पाइरोसल्फ, लाठी आदि की 80 मि.ली. मात्रा) को 150 लीटर पानी में मिलाकर बोने के 0 से 3 दिन बाद तक एक एकड़ खेत में छिड़काव करें।
अथवा - बिसपायरी बेक सोडियम (व्यवसायिक नाम- नोमीनी गोल्ड, एडोरा, स्ट्राइडर, बिसफोर्स आदि की 100 मि.ली. मात्रा) को 150 लीटर पानी में मिलाकर 1 एकड़ खेत में बोने अथवा रोपाई के 20 से 25 दिन के बाद छिड़काव करें।
अथवा - क्लोरीम्यूरान इथाइल़$मेटसल्फ्यूरान मिथाइल (व्यवसायिक नाम- आलमिक्स, धारमिक्स, दिग्गज आदि की 8 मि.ली. दवा) को 150 लीटर पानी मिलाकर 1 एकड़ खेत में बोने अथवा रोपाई के 20 से 25 दिन के बाद छिड़काव करें।
अथवा - बाजार में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण रसायनों का उपयोग भी किया जा सकता है। किन्तु उपयोग के पूर्व वैज्ञानिकों अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से परामर्श लें।
ऽ खरपतवार नियंत्रण के लिए हाथ से निंदाई, मशीन से निंदाई अथवा रासायनिक दवा नियंत्रण में एक हजार से डेढ़ हजार रू. प्रति एकड़ तक खर्च आता है, किन्तु यदि समय पर खरपतवारों को नियंत्रण नहीं किया गया तो 20 हजार रू. प्रति एकड़ की हानि हो सकती है।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्राथमिक सहकारी सोसायटी में पर्याप्त मात्रा में यूरिया, डी.ए.पी., एन.पी.के., सिंगल सुपरफास्फेट एवं पोटाश उर्वरकों का भंडारण कर दिया गया है। पिछले वर्ष के समान मात्रा में किसानों को उर्वरक देने के निर्देश जारी किए जा चुके है।
रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ हरी खाद एवं नील हरित काई का उपयोग करें
रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ हरी खाद एवं नील हरित काई के उपयोग से एक एकड़ में 1 बोरी यूरिया के बराबर नाइट्रोजन प्राप्त होती है तथा मिट्टी की संरचना में भी सुधार होता है।
एक एकड़ भूमि में अधिकतम 2 बोरी यूरिया एवं 1 बोरी डी.ए.पी. का उपयोग करें। किसान भाई डी.ए.पी. की पूरी मात्रा को बुआई या रोपाई के पूर्व दे दे। 1 बोरी यूरिया को बोने या रोपाई के 30-35 दिन बाद एवं 1 बोरी यूरिया को बोने या रोपाई के 60-70 दिन बाद दिया जावे।
जुलाई एवं अगस्त माह में धान की खेती में आने वाले कार्यों जैसे बुआई, रोपाई, उर्वरक प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन के लिए यह परामर्श जारी किए जा रहे है।
कृषि अनुसंधान केन्द्रों, कृषि विज्ञान केन्द्रों, कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि विभाग से सम्पर्क करें
सभी कृषि अनुसंधान केन्द्रों, कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों में कृषक सलाह केन्द्र स्थापित किए गए हैं। किसी भी प्रकार की कठिनाइयों के निराकरण के लिए अपने निकटस्थ कृषि अनुसंधान केन्द्रों, कृषि विज्ञान केन्द्रों, कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि विभाग से सम्पर्क करें।



