River interlinking project
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रायपुर 16 दिसंबर 2025/ ETrendingIndia / River interlinking project: Will help in tackling drought and flood problems with balanced use of water / नदियों को जोड़ने परियोजना , देश में जल संसाधनों के संतुलित उपयोग और सूखा–बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजनाओं पर सरकार लगातार काम कर रही है।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत चिन्हित 30 लिंक परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (एनडब्ल्यूडीए) ने पूर्व-व्यवहार्यता, व्यवहार्यता और कई परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली है।

डीपीआर बनाते समय प्रत्येक परियोजना के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) किया जाता है, ताकि पर्यावरण, जैव विविधता और स्थानीय लोगों पर पड़ने वाले प्रभावों का सही मूल्यांकन हो सके।

केन-बेतवा लिंक परियोजना-

(केबीएलपी) इस योजना की प्रमुख परियोजना है, जो अब कार्यान्वयन चरण में है। इस परियोजना के लिए ईआईए पूरा हो चुका है और पर्यावरण मंजूरी भी मिल गई है।

पन्ना टाइगर रिजर्व और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण के लिए एकीकृत भूदृश्य प्रबंधन योजना लागू की जा रही है, जिससे बाघ, गिद्ध और घड़ियाल जैसी प्रजातियों का संरक्षण हो सके।

परियोजना से प्रभावित लगभग 7,193 परिवारों के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने विशेष पुनर्वास और पुनर्स्थापन पैकेज को मंजूरी दी है।

पोलावरम सिंचाई परियोजना-

जिसमें गोदावरी-कृष्णा लिंक शामिल है, आंध्र प्रदेश में लागू की जा रही है और इसे केंद्र सरकार से अब तक 20,658 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिल चुकी है। वहीं, केन-बेतवा परियोजना के लिए पिछले तीन वर्षों में लगभग 3,969 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

सरकार का मानना है कि नदियों को जोड़ने की परियोजनाओं की सफलता राज्यों के सहयोग पर निर्भर करती है। जल बंटवारे, भूमि अधिग्रहण और कानूनी स्वीकृतियों जैसे मुद्दों के कारण कई बार देरी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार राज्यों के साथ निरंतर संवाद कर आम सहमति बनाने का प्रयास कर रही है। यह जानकारी जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।