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अमेरिका में रूस के खिलाफ प्रस्तावित नए प्रतिबंध विधेयक को लेकर एक बार फिर सियासी और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि इस विधेयक में केवल रूस ही नहीं, बल्कि ईरान से जुड़े व्यापार पर भी सख्त टैरिफ का प्रावधान जोड़ा जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ गई है।

अमेरिकी सीनेट से पारित प्रस्तावित विधेयक में ऐसे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जो रूस के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार जारी रखते हैं।

ट्रंप का कहना है कि यदि ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों को भी इसमें शामिल किया जाए, तो अमेरिकी प्रतिबंध नीति और अधिक प्रभावी हो सकती है।

यदि यह विधेयक अंतिम रूप लेकर कानून बन जाता है, तो भारत पर भी इसका असर पड़ सकता है।

भारत ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों के तहत रूस से तेल आयात करता है, जबकि ईरान के साथ भी उसके लंबे समय से आर्थिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं।

ऐसे में अमेरिका की नई नीति दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 100 प्रतिशत तक के संभावित टैरिफ से भारतीय निर्यातकों और उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर देखने को मिल सकता है।

हालांकि, यह विधेयक अभी पूरी तरह कानून नहीं बना है। इसे लागू होने से पहले अमेरिकी संसद की आगे की प्रक्रिया और राष्ट्रपति की मंजूरी से गुजरना होगा।

इसलिए फिलहाल अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन ट्रंप के ताजा बयान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

भारत सरकार फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में अमेरिका की नीति और विधेयक की अंतिम रूपरेखा यह तय करेगी कि इसका भारत-अमेरिका संबंधों और वैश्विक व्यापार पर कितना व्यापक प्रभाव पड़ता है।