RailOne App
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दिनांक 22 जुलाई 2026 / ETrendingIndia / RailOne App: 45.5 million downloads and 965,000 ticket bookings per day; 89% of reserved tickets booked online / यात्रियों के समग्र अनुभव में सुधार करने के लिए रेलवे ने 01 जुलाई 2025 को रेलवन ऐप (RailOne App) शुरू किया था। यह ऐप एंड्रॉइड प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। यह ऐप यात्रियों को मोबाइल फोन पर आरक्षित के साथ-साथ अनारक्षित टिकट बुक करने की सुविधा देता है।

यह ऐप भारतीय रेलवे की सभी यात्री-केंद्रित सेवाओं जैसे-आरक्षित टिकट बुकिंग, अनारक्षित टिकट बुकिंग, प्लेटफॉर्म टिकट, ट्रेन पूछताछ, पीएनआर पूछताछ, रेलमदद आदि को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करता है।

यह वास्तव में यात्री आरक्षण प्रणाली की सुविधा को यात्री की हथेलियों (मोबाईल) तक लाता है।

अब तक इस ऐप को 4.55 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। औसतन, रेलवन ऐप पर प्रतिदिन लगभग 9.65 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं (2.75 लाख आरक्षित और 6.89 लाख अनारक्षित)।

यात्री इस ऐप का इस्तेमाल करके बहुत आसानी से आरक्षित और अनारक्षित दोनों तरह के टिकट बुक कर सकते हैं।

‘रेलमदद’ भारतीय रेलवे का एक शिकायत निवारण तंत्र है, जो यात्रियों को शिकायत निवारण, सहायता और पूछताछ के लिए एक एकीकृत मंच प्रदान करता है।

रेलमदद में यात्री हेल्पलाइन नंबर -139, रेलमदद वेब, ऐप और एसएमएस जैसे कई माध्यमों से मदद प्राप्त कर सकते हैं।

समय पर शिकायतों का निवारण सुनिश्चित करने के लिए इसमें स्वचालित शिकायत आवंटन और ऑटो-एस्केलेशन प्रणाली शामिल है।

सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए 30 से अधिक ट्रेन और स्टेशन श्रेणियों में शिकायतों तथा सहायता कॉलों को दर्ज किया जाता है।

इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, रेलमदद ने 6,94,368 मामलों में सहायता प्रदान की, जिसमें 89.49% उत्कृष्ट और संतोषजनक फीडबैक प्राप्त हुआ।

यह प्लेटफॉर्म यात्रियों को शिकायतों के समाधान पर फीडबैक साझा करने में भी सक्षम बनाता है, जिससे भारतीय रेलवे को सेवा गुणवत्ता की निगरानी करने और यात्री संतुष्टि में सुधार करने में मदद मिलती है।

पिछले तीन वर्षों के दौरान हल की गई शिकायतों का विवरण नीचे दिया गया है:

वर्ष – कुल हल की गई शिकायतों का प्रतिशत

2023-2024 – 99.98%

2024-2025 – 99.99%

2025-2026 – 99.98%

भारतीय रेलवे की आरक्षण टिकट बुकिंग प्रणाली एक मजबूत और अत्यधिक सुरक्षित प्रणाली है जो उद्योग-मानक और अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा नियंत्रणों से लैस है।

इंटरनेट के माध्यम से तत्काल टिकट बुकिंग में धोखाधड़ी को रोकने के लिए हैकिंग टूल्स द्वारा फॉर्म के ऑटो-फिलिंग को रोकने और साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए भारतीय रेलवे ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  1. तत्काल टिकट बुक करने के लिए आधार सत्यापन- ऑनलाइन तत्काल टिकट बुक करने के लिए केवल आधार सत्यापित यात्रियों को ही अनुमति देने का प्रावधान किया गया है।

यह विशिष्टता की शर्त लागू करके फर्जी या अनधिकृत एजेंटों द्वारा संचालित बहु-उपयोगकर्ता (Multiple User Accounts) खातों के बनाने और संचालन को रोकने में मदद करता है।

इसने ऑनलाइन तत्काल बुकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाई है। दुरुपयोग को रोकने और तत्काल बुकिंग में निष्पक्षता में सुधार के लिए, चुनिंदा ट्रेनों में ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग के लिए आधार-आधारित वन-टाइम पासवर्ड (OTP) सत्यापन भी शुरू किया गया है।

  1. एप्लिकेशन लेयर सिक्योरिटी कंट्रोल- स्क्रिप्टिंग, ब्रूट-फोर्स अटैक और डिस्ट्रीब्यूटड डिनायल ऑफ सर्विस (DDoS) हमलों से बचने के लिए कई स्तरों पर एप्लिकेशन-स्तर के सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं।
  2. नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर सिक्योरिटी कंट्रोल- विफलता (Failures) को कम करने के लिए संपूर्ण ICT (सूचना और संचार प्रौद्योगिकी) अवसंरचना को उच्च उपलब्धता मोड में तैनात किया गया है।
  3. सुरक्षा ऑडिट और निगरानी- सुरक्षा घटनाओं की 24 घंटे निगरानी के लिए प्रणाली को CERT-In TSAP (खतरा और स्थितिजन्य जागरूकता परियोजनाएं) के साथ एकीकृत किया गया है। सुरक्षा घटनाओं की पहचान और उनसे निपटने के लिए ‘ऑन-प्रेमाइसेज’ सुरक्षा टीम द्वारा सिस्टम के सुरक्षा लॉग की निगरानी की जा रही है।
  4. प्रशासनिक उपाय– अनधिकृत पहुंच को रोकने और वास्तविक उपयोगकर्ताओं के लिए निर्बाध बुकिंग सुनिश्चित करने के लिए कई धोखाधड़ी-रोधी उपाय अपनाए गए हैं।
  • यूज़र अकाउंट्स का कड़ाई से पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन किया गया है। 01.01.2024 से 30.06.2026 की अवधि के दौरान, 6.68 करोड़ से अधिक यूजर खातों को निष्क्रिय किया गया और 6.22 करोड़ से अधिक यूजर खातों को पुनः सत्यापन के विकल्प के साथ अस्थायी रूप से निलंबित किया गया। IRCTC ने आधार लिंक न होने के कारण किसी भी यूजर अकाउंट को निष्क्रिय नहीं किया है। IRCTC असामान्य मोबाइल नंबरों, ईमेल डोमेन, आईपी एड्रेस आदि के आधार पर संदिग्ध यूजर आईडी की पहचान करने के लिए व्यापक मापदंड अपनाता है।