रायपुर, 5 अक्टूबर 2025 / ETrendingIndia / The earth will be bathed in silvery moonlight today: Sharad Purnima is a night of nectar showers, with Bhadra and Panchak also coinciding this year / शरद पूर्णिमा 2025 , आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि इस बार एक अद्भुत खगोलीय संगम लेकर आ रही है। 6 अक्टूबर की रात मनाई जाने वाली शरद पूर्णिमा पर इस वर्ष भद्रा और पंचक का विशेष संयोग बन रहा है।
पंचक दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर रात 10 बजकर 53 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद चांदनी में खीर रखने का शुभ मुहूर्त आरंभ होगा।
यह दिव्य पूर्णिमा 6 अक्टूबर की रात 12 बजकर 23 मिनट से 7 अक्टूबर की सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी।
ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होकर धरती पर अमृत बरसाता है।
ऐसा माना जाता है कि इस रात उसकी किरणें औषधीय और ऊर्जादायी होती हैं। इसी कारण इस दिन दूध से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे, चांद की रजत रोशनी में रखा जाता है। सुबह उसका सेवन ‘अमृत खीर’ के रूप में किया जाता है, जिससे सौभाग्य, स्वास्थ्य और शांति की प्राप्ति होती है।
हिंदू परंपरा में शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी के आगमन की रात्रि कहा गया है। इस दिन धन, समृद्धि और सौंदर्य की देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। माना जाता है कि जो साधक इस रात ध्यान, भजन या उपवास करते हैं, उनके जीवन में दिव्यता और समृद्धि का संचार होता है।
चांदनी से नहाई यह रात न केवल धार्मिक, बल्कि प्राकृतिक दृष्टि से भी अनुपम होती है — जब निर्मल आकाश में पूर्ण चंद्र अपनी रजत आभा बिखेरता है और पूरी सृष्टि एक अलौकिक प्रकाश में डूब जाती है।
यही है शरद पूर्णिमा की जादुई और पवित्र सुंदरता — जहां आस्था, सौंदर्य और ऊर्जा का संगम होता है।
इस वर्ष अभी तक बारिश होने और आसमान में बादल छाए रहने से हो सकता है कहीं चंद्रमा के इस दिव्य रूप के दर्शन हो और कहीं नहीं हो.
