Student Protest BreakingStudent Protest Breaking
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कोरबा, 08 सितंबर 2026। Student Protest Breaking : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से छात्रावास व्यवस्था को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पोड़ी उपरोड़ा के 100 सीटर कन्या छात्रावास की अधीक्षिका शारदा नेताम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। छात्राओं की शिकायत और चक्काजाम के बाद मामले की जांच कराई गई थी। तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में छात्राओं के प्रति अनुचित व्यवहार समेत छात्रावास में भोजन और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायतों की पुष्टि हुई। रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर ने निलंबन की कार्रवाई की है।

छात्राओं ने सड़क पर उतरकर किया था चक्काजाम

मामला 6 अगस्त 2026 का है। अधीक्षिका के कार्य-व्यवहार से परेशान छात्राओं ने मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम कर दिया था। छात्राओं की प्रमुख मांग अधीक्षिका को हटाने की थी। मामला बढ़ने के बाद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, पोड़ी उपरोड़ा ने तीन वरिष्ठ प्राचार्यों की जांच समिति गठित की। समिति ने मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी।

खराब भोजन और देर रात पूजा-पाठ की शिकायत भी हुई पुष्ट

जांच के दौरान छात्राओं की कई शिकायतें सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार अधीक्षिका का व्यवहार छात्राओं के प्रति उचित नहीं पाया गया। इसके अलावा निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं मिलने और भोजन की गुणवत्ता खराब होने की शिकायत की भी पुष्टि हुई। छात्रावास परिसर में देर रात तक पूजा-पाठ और घंटी बजाने की शिकायत भी जांच में सामने आई। बताया गया कि इससे छात्राओं की पढ़ाई और उनकी नींद प्रभावित हो रही थी।

गंभीर कदाचरण मानकर हुई निलंबन की कार्रवाई

जांच समिति की रिपोर्ट तथा जिला शिक्षा अधिकारी, कोरबा से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर ने शारदा नेताम के कृत्य को गंभीर कदाचरण माना। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, पोड़ी उपरोड़ा निर्धारित किया गया है।

छात्रावासों की व्यवस्था पर उठे सवाल

छात्राओं की शिकायत के बाद हुई इस कार्रवाई ने जिले के कन्या छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता, निर्धारित मेन्यू, अनुशासन और छात्राओं के साथ व्यवहार को लेकर प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। कार्रवाई के बाद अब छात्रावासों की व्यवस्थाओं और वहां छात्राओं को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी को लेकर भी प्रशासन के स्तर पर गंभीरता बढ़ने की उम्मीद है।


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