रायपुर, 07 जुलाई 2026/ Vishnubhog Rice: ‘Vishnubhog’ rice worth ₹45,000 sold in just 30 minutes! Women from GPM have scripted a new success story—find out why it is the talk of Chhattisgarh.
Vishnubhog Rice : छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने जैविक खेती और उद्यमिता का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो अब पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत तैयार ‘अरपा-बिहान विष्णुभोग’ चावल की मांग लगातार बढ़ रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पेंड्रा में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान केवल 30 मिनट में ₹45 हजार से अधिक के चावल की रिकॉर्ड बिक्री हुई।

जनप्रतिनिधियों ने भी खरीदा ‘विष्णुभोग’ चावल
कार्यक्रम में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपची और कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने स्वयं चावल खरीदकर महिलाओं के प्रयासों की सराहना की और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
200 किलो खरीदकर बने सबसे बड़े खरीदार
स्थानीय निवासी पंकज तिवारी ने एक साथ 200 किलोग्राम विष्णुभोग चावल खरीदकर इस अभियान के सबसे बड़े खरीदार बनने का गौरव हासिल किया। उनके इस कदम के बाद अन्य लोगों ने भी स्थानीय उत्पाद खरीदने में रुचि दिखाई।
जैविक खेती से राष्ट्रीय बाजार तक का सफर
महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPO) के माध्यम से महिलाओं द्वारा जैविक पद्धति से उगाए गए विष्णुभोग धान का वैज्ञानिक प्रसंस्करण, आकर्षक ब्रांडिंग, आधुनिक पैकेजिंग और व्यवस्थित विपणन किया जा रहा है। इससे महिलाओं को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है और उत्पाद की बाजार में मजबूत पहचान बन रही है।
250 एकड़ में होगा उत्पादन
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक दुर्गाशंकर सोनी के अनुसार, जिले के 179 CMSA गांवों में इस वर्ष 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विष्णुभोग धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देना, किसानों की आय बढ़ाना और ‘लखपति दीदी’ अभियान को मजबूती देना है।
महिलाओं की आत्मनिर्भरता का नया प्रतीक
कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन और जिला पंचायत CEO मुकेश रावटे के मार्गदर्शन में विष्णुभोग चावल को लगातार सरकारी कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के जरिए बढ़ावा दिया जा रहा है। आज ‘अरपा-बिहान विष्णुभोग’ सिर्फ एक चावल नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, जैविक खेती और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनता जा रहा है।
