Sweden's new technology
Sweden's new technology
Share This Article

रायपुर 19 नवम्बर 2025/ ETrendingIndia / Sweden’s new technology: EV vehicles can now be charged on the go / स्वीडन ईवी चार्जिंग तकनीक , स्वीडन ने इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। देश ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसके माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) सड़क पर चलते हुए ही चार्ज हो सकेंगे। यह दुनिया का पहला स्थायी ई-मोटरवे मॉडल है, जिसे वास्तविक परिस्थितियों में सफलतापूर्वक परखा जा रहा है।

माना जा रहा है कि इस तकनीक से ईवी के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और चार्जिंग स्टेशनों पर निर्भरता में भारी कमी आएगी।

स्वीडन सरकार ने 2030 तक परिवहन क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन का उपयोग 70 प्रतिशत तक घटाने का लक्ष्य रखा है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए देश तेजी से ईवी-मित्र सड़क ढांचे का विस्तार कर रहा है। साथ ही 2035 तक तीन हजार किलोमीटर लंबी और 2045 तक 1,900 मील (करीब 3,000 किमी) विद्युत सड़कें बनाने की योजना तैयार की गई है।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

ई-डायनामिक चार्जिंग तकनीक मूलतः तीन तरीकों पर आधारित है—

  1. ओवरहेड लाइन सिस्टम: भारी वाहनों के लिए ऊपर लगे तारों से ऊर्जा आपूर्ति, बिल्कुल ट्रॉलीबस मॉडल की तरह।
  2. कंडक्टर रेल (ग्राउंड-बेस्ड) सिस्टम: सड़क की सतह पर लगे रेल ट्रैक वाहन के चलने पर ऊर्जा प्रदान करते हैं।
  3. इंडक्टिव चार्जिंग सिस्टम: सड़क के भीतर कॉइल्स लगाई जाती हैं, जो वाहन के नीचे से संपर्क किए बिना वायरलेस तरीके से बैटरी चार्ज करती हैं।

स्वीडन में चल रहे पायलट प्रोजेक्ट में इंडक्टिव चार्जिंग को विशेष रूप से सफल पाया गया है। सड़क के अंदर विशेष उपकरण स्थापित किए गए हैं, जो वाहन गुजरते ही उसे बिजली देना शुरू कर देते हैं। इससे वाहन की बैटरी बहुत कम समय में पर्याप्त स्तर तक चार्ज हो जाती है।

ईवी उद्योग के लिए नई उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल व्यापक स्तर पर लागू किया गया, तो इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी साइज़ कम हो जाएगी, जिससे ईवी गाड़ियां सस्ती होंगी और उनकी रेंज को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता भी खत्म होगी। साथ ही सार्वजनिक परिवहन में ऊर्जा उपयोग अधिक कुशल हो सकेगा।

हालांकि, इस टेक्नोलॉजी के बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए भारी निवेश और मानकीकरण की जरूरत होगी। फिर भी, भविष्य की Green Transport System के लिए यह तकनीक बेहद महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।