रायपुर 1 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / वस्त्र क्षेत्र बजट प्रोत्साहन , केंद्रीय बजट 2026-27 में श्रम-प्रधान वस्त्र क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है, क्योंकि यह रोजगार सृजन, निर्यातवृद्धि और ग्रामीण आजीविका में अहम भूमिका निभाता है।
सरकार ने फाइबर से फैशन तक पूरी वस्त्र मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए एकीकृत नीतिगत ढांचा प्रस्तुत किया है।
वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है, जिसमें पाँच प्रमुख घटक शामिल हैं-
राष्ट्रीय रेशा योजना: रेशम, ऊन, जूट सहित प्राकृतिक और मानव निर्मित रेशों को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता बढ़ाई जाएगी।
वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना: पारंपरिक वस्त्र समूहों का आधुनिकीकरण कर उत्पादन और रोजगार बढ़ाया जाएगा।
राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम: बुनकरों और कारीगरों को एकीकृत सहायता देकर उनकी आय बढ़ाई जाएगी।
टेक्स-इको पहल: पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ वस्त्र निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा।
समर्थ 2.0: उद्योग और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से कुशल मानव संसाधन तैयार किए जाएंगे।
देश में आधुनिक सुविधाओं से युक्त मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएंगे, जिससे तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के तहत खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार से जोड़ा जाएगा।
वस्त्र और चमड़ा निर्यातकों के लिए निर्यात दायित्व अवधि 6 माह से बढ़ाकर 12 माह कर दी गई है।
एमएसएमई को नकदी सुविधा देने के लिए टीआरईडीएस को मजबूत किया गया है और 10,000 करोड़ रुपये का विकास कोष बनाया गया है।
यह बजट भारत को वैश्विक वस्त्र निर्माण और निर्यात केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
