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रायपुर, 9 मार्च 2026 / ETrendingIndia / Three-day workshop: Conservation of Chhattisgarh’s archaeological heritage gets new support / छत्तीसगढ़ पुरातत्त्वीय धरोहर संरक्षण , छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण और उनके प्रति जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का सोमवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ।

7 से 9 मार्च तक आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश के 21 जिलों से आए जिला पुरातत्त्व संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की।

“जिला पुरातत्त्वीय संघों के निर्माण एवं कार्यविधियां” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने पुरातत्त्वीय स्थलों की पहचान, संरक्षण और प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी।

रीवांगढ़ उत्खनन स्थल और पुरखौती मुक्तांगन का भ्रमण

कार्यशाला के अंतिम दिन प्रतिभागियों को नव उत्खनित पुरास्थल रीवांगढ़ और पुरखौती मुक्तांगन संग्रहालय का भ्रमण कराया गया। इस दौरान उन्हें उत्खनन की प्रक्रिया, पुरावशेषों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया गया।

धरोहरों के संरक्षण में जनभागीदारी जरूरी

संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कई प्राचीन स्थल और स्मारक राज्य के गौरवशाली इतिहास के साक्षी हैं। इनके संरक्षण के लिए समाज की भागीदारी बहुत आवश्यक है। जिला पुरातत्त्व संघों के माध्यम से स्थानीय लोगों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है।

प्रतिभागियों को दिए गए प्रमाणपत्र

समापन समारोह में पद्मश्री डॉ. अजय मंडावी और डॉ. पीसी पारख ने प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र प्रदान किए।