रायपुर 8 मई 2026/ ETrendingIndia / Nuclear technology boosts Indian mango exports / भारतीय आम निर्यात , भारत के आम अब परमाणु तकनीक की मदद से अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों तक सुरक्षित पहुंच रहे हैं।
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) द्वारा विकसित विकिरण तकनीक से आम और लीची जैसे जल्दी खराब होने वाले फलों की भंडारण अवधि बढ़ रही है। इससे कृषि निर्यात को नई ऊर्जा मिली है और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है।
सख्त विदेशी नियमों का मिला समाधान
अमेरिका सहित कई देशों में ऐसे फलों के आयात की अनुमति होती है, जिनमें कीट या उनके अंडे न हों। इसी कारण लंबे समय तक भारतीय आम विदेशी बाजारों से बाहर रहे।
वर्ष 2007 में अमेरिका ने भारतीय आमों के आयात की अनुमति दी, जिसके बाद विकिरण तकनीक की मदद से निर्यात लगातार बढ़ता गया।
हर साल 30 हजार टन उपचारित आम का निर्यात
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपिडा) के अनुसार भारत हर वर्ष लगभग 30 हजार टन उपचारित आमों का निर्यात करता है। देश में अभी 33 विकिरण उपचार केंद्र कार्यरत हैं।
कैसे होती है विकिरण प्रक्रिया
आम को कच्ची लेकिन परिपक्व अवस्था में तोड़ने के बाद धोकर उसकी गुणवत्ता के अनुसार छंटाई की जाती है। फिर विशेष बॉक्स में पैक कर विकिरण चैंबर में रखा जाता है, जहां नियंत्रित मात्रा में गामा किरणें, एक्स-रे या इलेक्ट्रॉन बीम दी जाती हैं।
इससे कीट, लार्वा और सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं तथा फल लंबे समय तक ताजा रहता है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक
भारत में हर साल 240 लाख टन से अधिक आम का उत्पादन होता है, जो दुनिया के कुल उत्पादन का लगभग आधा माना जाता है।
अल्फांसो, केसर, चौसा और लंगड़ा जैसी भारतीय किस्मों की विदेशों में भारी मांग है।
किसानों और निर्यातकों को फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक फलों की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ खाद्य सुरक्षा मानकों को भी पूरा करती है। इससे भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक बाजार में पहुंच बढ़ रही है और किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है।
