रायपुर 27 मई 2026 / ETrendingIndia / दिल्ली जिमखाना क्लब पर बढ़ी चर्चा
देश के सबसे प्रतिष्ठित क्लबों में शामिल दिल्ली जिमखाना क्लब इन दिनों फिर सुर्खियों में है। केंद्र सरकार द्वारा क्लब परिसर खाली करने के नोटिस के बाद इसकी सदस्यता और वेटिंग लिस्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कई लोग इसे “सुपर रिच” लोगों का क्लब मानते हैं। हालांकि, क्लब के कुछ सदस्यों ने इस धारणा को गलत बताया है।
क्या सिर्फ अमीर लोगों के लिए है क्लब?
दिल्ली जिमखाना क्लब की सदस्य रुमनिता मित्तल ने कहा कि क्लब सिर्फ अमीर लोगों के लिए नहीं है। उनके अनुसार लगभग 50 प्रतिशत स्थायी सदस्य सेना और नौकरशाही से जुड़े रिटायर्ड अधिकारी हैं।
उन्होंने बताया कि कई सदस्य रिटायरमेंट के बाद यहां समय बिताने आते हैं। साथ ही यह जगह सामाजिक मेलजोल और शांत माहौल के लिए भी जानी जाती है।
सदस्यता के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट
दिल्ली जिमखाना क्लब की सदस्यता हमेशा से चर्चा में रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां सदस्य बनने के लिए 20 से 40 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।
इसके अलावा सदस्यता आवेदन शुल्क भी काफी अधिक बताया जाता है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि सरकारी अधिकारियों के लिए यूटिलिटी चार्ज 5 हजार रुपए से बढ़कर 1.5 लाख रुपए तक पहुंच गया था। वहीं गैर-सरकारी उम्मीदवारों के लिए यह राशि 7.5 लाख रुपए तक बताई गई।
केंद्र सरकार ने क्यों भेजा नोटिस?
केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय ने क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने का आदेश दिया है। सरकार का कहना है कि यह जमीन सार्वजनिक हित और रक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे के लिए जरूरी है।
दिल्ली जिमखाना क्लब करीब 27.3 एकड़ जमीन पर स्थित है। यह क्लब वर्ष 1913 में “इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब” के नाम से शुरू हुआ था। बाद में आजादी के बाद इसका नाम बदल दिया गया।
क्लब की कार्यप्रणाली पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
वर्ष 2017 में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने क्लब की कार्यप्रणाली की जांच शुरू की थी। कुछ सदस्यों ने अनियमितताओं की शिकायत की थी।
