Sesame Farming: Good news for farmers! Now, earn more at a lower cost... A unique initiative by KVK... Along with paddy, *Ramtil* (Niger seed) will now also become a source of income.
Til Farming
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रायपुर, 11 जुलाई 2026/ Sesame Farming: Good news for farmers! Now, earn more at a lower cost… A unique initiative by KVK… Along with paddy, Ramtil (Niger seed) will now also become a source of income.

Til Farming : बस्तर जिले में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ने खरीफ सीजन में बड़ी पहल की है। जिले के विभिन्न विकासखंडों में 225 एकड़ क्षेत्र में रामतिल (नाइजर) और तिल के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन शुरू किए जा रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य किसानों को कम लागत वाली तिलहनी फसलों की ओर आकर्षित करना और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है।

200 एकड़ में रामतिल, 25 एकड़ में तिल

योजना के तहत बस्तानार, बस्तर, दरभा और चित्रकोट के गुरिया क्षेत्र में 200 एकड़ में रामतिल, जबकि तोकापाल और बस्तर विकासखंड में 25 एकड़ में तिल की खेती का प्रदर्शन किया जाएगा। इस अभियान से 100 से 200 प्रगतिशील किसानों को जोड़ा जा रहा है। किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और कृषि विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी मिलेगा।

कम लागत, ज्यादा मुनाफा

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक रामतिल और तिल ऐसी फसलें हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की आवश्यकता बेहद कम होती है। इससे उत्पादन लागत घटती है और किसानों को बेहतर शुद्ध लाभ मिलता है। यही वजह है कि इन्हें मक्का जैसी पारंपरिक फसलों का बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

धान उत्पादन को भी मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का कहना है कि रामतिल के पीले फूल बड़ी संख्या में मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं। धान में फूल आने के दौरान मधुमक्खियों की सक्रियता बढ़ने से प्राकृतिक परागण बेहतर होता है, जिससे आसपास के धान के खेतों की उत्पादकता पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।

बदल रहा है बस्तर का कृषि मॉडल

खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और बाजार में बेहतर कीमत मिलने के कारण बस्तर के किसान फिर से तिलहनी फसलों की ओर लौट रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र की यह पहल किसानों को वैज्ञानिक खेती, कम लागत और अधिक आय का नया विकल्प देने के साथ जिले में टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।