दुर्ग, 03 मई। CGPSC Scam News: Early Morning Raid at Retired IAS Officer J.K. Dhruv’s Residence… The Massive Scheme to Appoint 13 Relatives as Deputy Collectors
CGPSC Scam : छत्तीसगढ़ के चर्चित CGPSC भर्ती घोटाला मामले में बुधवार सुबह बड़ा घटनाक्रम सामने आया। रिटायर्ड आईएएस अधिकारी जेके ध्रुव के भिलाई सेक्टर-10 स्थित निवास पर तड़के छापेमार कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 2 बजे दो गाड़ियों में अफसरों की टीम उनके घर पहुंची और दस्तावेजों की जांच शुरू की।
हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कार्रवाई CBI, ED या EOW की टीम कर रही है। जांच एजेंसी की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
क्या है पूरा CGPSC घोटाला?
CGPSC 2021 भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, पेपर लीक और रसूखदारों के रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है।
CBI जांच में खुलासा हुआ कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग कर रिश्तेदारों और करीबियों को लाभ पहुंचाया। आरोप है कि एक निजी कंपनी से CSR फंड के 45 लाख रुपए एक NGO को दिए गए, जिसकी अध्यक्ष सोनवानी की पत्नी थीं। इसके बदले प्रश्नपत्र लीक किए गए।
पेपर लीक से डिप्टी कलेक्टर तक का खेल
CBI के अनुसार, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर ने उद्योगपति श्रवण गोयल को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए। बाद में यही पेपर उनके बेटे और बहू तक पहुंचाए गए, जिनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ। वहीं, सोनवानी के रिश्तेदारों का चयन डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे पदों पर होने से मामला और ज्यादा चर्चा में आया।
टॉप-20 में 13 रिश्तेदार!
CBI जांच में यह भी सामने आया कि CGPSC 2021 के टॉप-20 चयनित अभ्यर्थियों में 13 से ज्यादा उम्मीदवार किसी न किसी नेता, अधिकारी या प्रभावशाली कारोबारी परिवार से जुड़े थे। इसी के बाद चयन सूची को कोर्ट में चुनौती दी गई और मामला CBI को सौंपा गया।
हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार
मामले में आरोपियों ने जमानत की मांग करते हुए खुद को निर्दोष बताया, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपी इस पूरे षड्यंत्र में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आते हैं। कोर्ट ने माना कि मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए फिलहाल जमानत देना उचित नहीं होगा।
कोलकाता से रायपुर तक फैला नेटवर्क
CBI चार्जशीट के मुताबिक, प्रश्नपत्र छापने का काम कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी को दिया गया था। जनवरी 2021 में कंपनी कर्मचारी महेश दास सात सेट प्रश्नपत्र लेकर रायपुर पहुंचा था। आरोप है कि इन्हें आरती वासनिक के जरिए घर ले जाकर कॉपी किया गया और फिर दोबारा सील कर प्रिंटिंग के लिए भेज दिया गया।
171 पदों के लिए हुई थी परीक्षा
CGPSC 2021 परीक्षा में कुल 171 पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। फरवरी 2022 में प्री परीक्षा हुई, जिसमें 2565 अभ्यर्थी पास हुए। इसके बाद मई 2022 में मेंस परीक्षा और इंटरव्यू के बाद मई 2023 में चयन सूची जारी की गई थी।
