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रायपुर जून 3, 2026 / ETrendingIndia / “Sapre Museum, Bhopal: Youth should draw inspiration from the glorious tradition of Hindi journalism – Governor” हिन्दी पत्रकारिता गौरवशाली परंपरा – मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का प्रारंभिक काल अत्यंत चुनौती पूर्ण था। कर्मठ पत्रकारों ने ब्रिटिश हुकूमत की अनेक कठिनाईयों के बावजूद पत्रकारिता के आदर्शों और शुचिता को बनाए रखा। हिन्दी पत्रकारिता की इसी गौरवशाली परंपरा से युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।

राज्यपाल बुधवार को “हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी महोत्सव, पुरखों को प्रणाम : पोस्टर प्रदर्शनी” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान द्वारा किया गया है।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि पत्रकारिता कोई साधारण व्यवसाय नहीं, यह समाज के प्रति उत्तरदायित्व, सत्य के प्रति निष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

हिन्दी पत्रकारिता ने अपने आरंभ से ही समाचार प्रसार की सीमाओं से आगे बढ़कर कार्य किया। समाज के दिशा दर्शन, जनमत को सशक्त बनाने तथा राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का सशक्त प्रयास किया है।

हिन्दी पत्रकारिता को डिजिटल माध्यमों और युवाओं से जोड़ना जरूरी

राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान और तकनीक के इस दौर में हिन्दी पत्रकारिता को वीडियो, पॉडकास्ट, वेबसाइट और मोबाइल मंचों के माध्यम से युवा पीढ़ी से जोड़ना आवश्यक है।

राज्यपाल ने जीवनी के लोकार्पण के लिए माना आभार

कार्यक्रम में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के जीवन पर आधारित पुस्तक “पीर पराई जाने रे” का लोकार्पण किया गया।

पुस्तक का लेखन लोकभवन की कंट्रोलर श्रीमती शिल्पी दिवाकर और मुद्रण-प्रकाशन माधवराव सप्रे संग्रहालय द्वारा किया गया है।

राज्यपाल ने जीवनी लेखन, प्रकाशन से संबंधित सभी लोगों का आभार माना।

महापौर श्रीमती मालती राय ने कहा कि भारत में पत्रकारिता का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। हमारी ज्ञान परंपरा में भी देखा जा सकता है।

वरिष्ठ पत्रकार और संपादक श्री महेश श्रीवास्तव ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, व्यावसायिकता आदि की चुनौतियों के संदर्भ में विचार व्यक्त किए।

राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने कहा कि महाभारत के पात्र संजय को आधुनिक लाइव प्रसारण का अग्रदूत माना जा सकता है, क्योंकि वे धृतराष्ट्र को युद्ध का प्रत्यक्ष वर्णन सुनाते थे। नारद ऋषि ने लोक-कल्याण के लिए सूचनाओं का आदान-प्रदान किया, उसी परंपरा को आज पत्रकार आगे बढ़ा रहे हैं।

राज्यपाल का माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान के संस्थापक श्री विजयदत्त श्रीधर ने पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया।


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