Iran to manage Strait of Hormuz
Iran to manage Strait of Hormuz
Share This Article

रायपुर,23 जून 2026/ ETrendingIndia / “Iran to manage Strait of Hormuz: Will establish center and resolve issues via hotline together with America”अमेरिका के साथ समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में पहले दौर की बातचीत में मौजूद ईरान की ओर से मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलिबाफ पहली बार मीडिया के सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण ईरान का होगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ जो समझौता हुआ है, उसी के बनाए गए इंतजाम के तहत होर्मुज को पूरी तरह से ईरान ही संभालेगा।

गलिबाफ ने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रबंधन करेगा, उन कानूनों (समझौता) के हिसाब से और ईरान द्वारा बनाए गए इंतजामों के तहत होर्मुज में दिक्कतें आ सकती हैं।

इसलिए, हम एक केंद्र और एक टेलीफोन हॉटलाइन बनाने पर राजी हुए ताकि, 30-दिन के समय में, अगर कोई दिक्कत आती है, तो उसे और तेजी से सुलझाया जा सके।

उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान मैं पहला व्यक्ति था जिसने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अपनी पुरानी स्थिति में वापस नहीं लौटेगा।

गलिबाफ ने स्विट्जरलैंड में विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया, मुझे पता चला कि ट्रंप ने हमारे राष्ट्रपति, प्रतिनिधिमंडल और हमलों के बारे में धमकी दी थीं।

मैंने जेडी वेंस (अमेरिकी उपराष्ट्रपति) से कहा-हम यहां बातचीत कर रहे हैं, और हस्ताक्षर किए गए समझौते के मुताबिक, पहले क्लॉज़ में लिखा है कि कोई धमकी या जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए।

फिर भी आज आपके राष्ट्रपति ने धमकी दी है। हम कभी भी धमकी या दबाव में बातचीत नहीं कर सकते।

गलिबाफ ने बताया, हमने बातचीत खत्म की, मीटिंग छोड़ दी और वापस नहीं आए। अमेरिकी पक्ष ने मध्यस्थों के जरिए एक और मीटिंग की मांग की, लेकिन हमने मना कर दिया।

फिर कतर और पाकिस्तानी मध्यस्थ से हमने कहा कि हम उनसे बात करेंगे, लेकिन सीधे अमेरिकी पक्ष से नहीं। इसके बाद बातचीत हुई। उन्होंने कहा, हमारे कुछ उसूल हैं, और अब तक, हम कभी भी अमेरिकियों के साथ एक ही फोटो या फ्रेम में नहीं दिखना चाहते थे।

गलिबाफ ने कहा कि सैन्य क्षेत्र में कोई कामयाबी तभी मिलती है, जब उस जीत को कानूनी और राजनीतिक तौर पर मान्यता मिले और वह लंबे समय तक चलने वाली हो।

उन्होंने कहा, कूटनीति के बिना, लड़ाई के मैदान में की गई कोशिशें कामयाब नहीं होंगी। बातचीत संघर्ष का एक तरीका है और संघर्ष को जारी रखना है। इसलिए, इन दोनों एरिया के बीच झूठा फर्क पैदा करना एक गुमराह करने वाली चर्चा है।