बाल गीत
बाल गीत
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बन कर रेल

आओ  मिलकर 
खेलें  खेल ।
छुक छुक गाड़ी
बन कर रेल ।।

कोई टी टी 
बन कर आओ ।
पेसेंजर को 
राह बताओ

बिना टिकिट 
जिसको भी पाओ।
भरपूर   दण्ड  
उसे   दिलवाओ ।।

जानों यही 
नियम है भाई ।
टी टी से मत 
करो लड़ाई ।।

कभी किसी से
कुछ ना लेना ।
गैरों को भी
कुछ ना देना।।

चोरों से बचकर
है रहना ।
बात सभी
बच्चों से कहना।।

ख़तम हुआ है
आज का खेल ।
खड़ी हो गई 
  अपनी  रेल ।।

उतरो भाई
  घर चलना है।
 घर जा कर 
 पढ़ना -लिखना है ।।

रायपुर, 10 जुलाई 2026/ ETrendingIndia /

  शैलेन्द्र गुप्ता नर्मदा नगर, बिलासपुर

श्री शैलेन्द्र गुप्ता,सहायक लेखाधिकारी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति उपरांत कृषि कार्य और साहित्य सेवा में रत है.

प्रकाशन–1 छंद शाला में श्री राम साझा संकलन, 2 छंद शाला उपवन में चौपाइयां साझा संकलन 3 छंद शाला में दोहा गीत साझा संकलन के साथ छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह( कहाँ,गावं गय गाँव, बचपन,बड़ा सुहाना (बाल कविता), होगी पूरी साधना (मनहरण घनाक्षरी) . हिंदी साहित्य भारती छत्तीसगढ़ प्रदेश मंत्री , कोषा अध्यक्ष छन्दशाला बिलासपुर है .निवास H1/94 नर्मदा नगर बिलासपुर है.