Sports Injury Centre
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रायपुर, 10 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / “MoU between Sports Injury Centre Safdarjung and SAI: Indian athletes to get world-class healthcare facilities” स्पोर्ट्स मेडिसिन और एथलीटों की देखभाल को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत सफदरजंग अस्पताल के स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर – SIC और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के तहत स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया – SAI के बीच आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

यह एमओयू केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के खेल विभाग के सचिव हरि रंजन राव की मौजूदगी में किया गया।

इस साझेदारी का उद्देश्य भारतीय एथलीटों और सपोर्ट स्टाफ के लिए विश्व स्तरीय स्वास्थ्य प्रणाली बनाना है।

सफदरजंग अस्पताल का स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर भारत का प्रमुख टर्शियरी केयर सेंटर है, जो पूरी तरह से स्पोर्ट्स मेडिसिन, आर्थ्रोस्कोपी, स्पोर्ट्स इंजरी मैनेजमेंट, पुनर्वास और खेल विज्ञान के लिए समर्पित है।

वहीं SAI देशभर में खेल प्रतिभाओं को निखारकर विश्व-स्तरीय खिलाड़ी तैयार करने में अहम भूमिका निभाती है।

इस सहयोग के तहत SIC की चिकित्सकीय विशेषज्ञता और SAI के व्यापक एथलीट सपोर्ट नेटवर्क को एक साथ लाया जाएगा। इसका मकसद स्पोर्ट्स इंजरी से बचाव, जांच, इलाज, पुनर्वास और स्पोर्ट्स साइंस सपोर्ट की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, ताकि एथलीट अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।

एमओयू में खेल विज्ञान, चिकित्सकीय शिक्षा, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और अनुसंधान में सहयोग की भी परिकल्पना की गई है।

दोनों संस्थान मिलकर प्रमाण आधारित इलाज के तरीके और चोट से बचाव की रणनीतियां विकसित करेंगे।केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने इसे खेल में उत्कृष्टता की ओर भारत की यात्रा का महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा कि यह एमओयू स्वास्थ्य और खेल क्षेत्रों के बीच लंबे समय तक चलने वाली साझेदारी की शुरुआत है।

उन्होंने मंत्रालय की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। श्रीवास्तव ने कहा कि मंत्रालय स्पोर्ट्स मेडिसिन सुविधाओं का नेटवर्क बढ़ाने और स्नात्तकोत्तर शिक्षा को मजबूत करने पर विचार करेगा, ताकि प्रशिक्षित विशेषज्ञों की बड़ी टीम तैयार हो सके।

उन्होंने नए एम्स संस्थानों को स्पोर्ट्स मेडिसिन सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने की बात भी कही।

खेल विभाग के सचिव हरि रंजन राव ने कहा कि स्पोर्ट्स मेडिसिन रिसर्च में भारतीय एथलीटों की शारीरिक बनावट और जरूरतों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मौजूदा कई प्रोटोकॉल पश्चिमी डेटा पर आधारित हैं, जो भारतीय एथलीटों के लिए हमेशा उपयुक्त नहीं होते। इसलिए भारत-विशिष्ट वैज्ञानिक प्रमाण तैयार करने और घरेलू प्रोटोकॉल विकसित करने की जरूरत है।

उन्होंने SAI के उत्कृष्टता केंद्रों को आस-पास के मेडिकल कॉलेजों से जोड़ने और आर्थोपेडिक विशेषज्ञों को एथलीटों के साथ काम करने का अवसर देने का सुझाव दिया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा, SAI सचिव राम सिंह, सफदरजंग अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता रानी शर्मा और SIC के निदेशक डॉ. दीपक जोशी सहित दोनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।