Chirayu YojanaChirayu Yojana
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रायपुर, 26 सितंबर 2026। Chirayu Yojana : रायपुर, 26 सितम्बर 2026/ बस्तर जिले के एक साधारण परिवार की नन्ही बेटी परिक्रमा साहू के जीवन में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की ‘चिरायु’ टीम और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साझा प्रयासों से एक नई सवेरा आया है। जन्म से ही सुनने और बोलने की क्षमता से वंचित परिक्रमा अब न केवल हर ध्वनि को सुन और पहचान पा रही है, बल्कि एक सामान्य बच्चे की तरह खुशहाल जीवन जीते हुए स्कूल भी जाने लगी है।

यह सुखद और प्रेरणादायक बदलाव जगदलपुर के अघनपुर निवासी श्री अनूप साहू के परिवार में देखने को मिला है। जब परिक्रमा मात्र तीन वर्ष की थी, तब चिरायु टीम नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के सिलसिले में स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र पहुँची थी। वहाँ टीम के सदस्यों ने देखा कि एक मासूम बच्ची एक कोने में बिल्कुल शांत और अपने आप में खोई बैठी है। बातचीत करने की कोशिश पर जब बच्ची की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से इस संबंध में पूछताछ की गई। कार्यकर्ता ने जानकारी दी कि यह बच्ची जन्म से ही न तो कुछ सुन पाती है और न ही बोल पाती है।

इसके बाद तत्काल बच्ची के माता-पिता को बुलाया गया। बातचीत के दौरान परिजनों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि बच्ची जन्मजात बधिरता से ग्रसित है और वे इसे अपनी नियति मानकर उसके दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने का प्रयास कर रहे थे। चिरायु टीम ने माता-पिता को ढांढस बंधाया और समझाया कि आधुनिक चिकित्सा और सर्जरी के जरिए इस जन्मजात समस्या का पूरी तरह समाधान संभव है तथा ऑपरेशन के बाद बच्ची सामान्य बच्चों की तरह सुन सकेगी।

परिजनों की सहमति के बाद बच्ची को तुरंत महारानी जिला अस्पताल जगदलपुर स्थित जिला शीघ्र हस्तक्षेप इकाई लाया गया। यहाँ बच्ची की आवश्यक ‘बेरा’ जांच की गई और विशेषज्ञ उपचार के लिए उसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर रेफर किया गया। एम्स के चिकित्सकों ने परीक्षण के उपरांत कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी की सलाह दी, परंतु सर्जरी से पूर्व लगभग एक वर्ष तक अनिवार्य ऑडियो थेरेपी आवश्यक थी, जिसे जिला शीघ्र हस्तक्षेप इकाई जगदलपुर के माध्यम से पूरी निष्ठा के साथ संपन्न कराया गया।

आवश्यक प्रारंभिक प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद 1 अप्रैल 2024 को एम्स रायपुर में बच्ची का सफल कॉकलियर इम्प्लांट ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के उपरांत बच्ची के जीवन में आवाजों का नया संसार खुल गया और वह सुनने में सक्षम हो गई। वर्तमान में 5 वर्ष की हो चुकी परिक्रमा को जिला शीघ्र हस्तक्षेप इकाई के माध्यम से नियमित स्पीच थेरेपी दी जा रही है। अब वह पूरी तरह सामान्य जीवन जी रही है और स्कूल जाना भी शुरू कर दिया है, जिससे उसके माता-पिता और अन्य परिजनों में खुशी का माहौल है।


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