रायपुर, 07 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / “EV policies of Delhi and Chhattisgarh will boost clean transport… but delivering timely benefits will be the biggest challenge” देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली और छत्तीसगढ़ ने अलग-अलग मॉडल अपनाए हैं। दिल्ली सरकार ने सख्त नियामक नीति लागू करते हुए 1 जनवरी 2027 से नए यात्री और मालवाहक ऑटो तथा छोटे मालवाहक वाहनों का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक करने का फैसला लिया है। वहीं 1 अप्रैल 2028 से नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण भी केवल इलेक्ट्रिक होगा।
इसके अलावा, नीति लागू होने के तीन महीने के भीतर खरीदे गए पहले 1,000 इलेक्ट्रिक ट्रकों को 10 वर्षों तक ‘नो एंट्री’ समय में भी प्रवेश की विशेष अनुमति मिलेगी, जिससे प्रदूषण कम करने और स्वच्छ माल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
लेकिन इसके साथ-साथ 30 लाख रूपये तक के इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने पर सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, जो नागरिकों को ईवी वाहन खरीदने को प्रोत्साहित कर रहा है.
दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2022 में ईवी नीति लागू कर रोड टैक्स में छूट और वाहन खरीद पर सब्सिडी जैसी आकर्षक सुविधाएं दीं।
लेकिन राज्य में 52,265 ईवी खरीदारों की करीब 115.85 करोड़ रुपये की सब्सिडी अब भी लंबित है। इससे कई उपभोक्ताओं को योजना का वास्तविक लाभ समय पर नहीं मिल सका।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली की सख्त नीति और छत्तीसगढ़ की प्रोत्साहन आधारित योजना, दोनों का उद्देश्य एक ही है—प्रदूषण कम करना, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाना।
यदि छत्तीसगढ़ में लंबित सब्सिडी का शीघ्र भुगतान हो और दिल्ली जैसी सख्त लेकिन प्रोत्साहित करने वाली नीति प्रभावी ढंग से लागू हो, तो नागरिकों को ईंधन खर्च में बचत, बेहतर वायु गुणवत्ता, कम परिचालन लागत और पर्यावरण संरक्षण जैसे बड़े लाभ मिल सकते हैं।
इससे ईवी उद्योग, चार्जिंग ढांचे और रोजगार के नए अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। योजनाओं की सफलता अंततः उनके प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
