रायपुर, 28 जुलाई। IGKV Crisis : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पेंशन, महंगाई राहत (DR) और अन्य लंबित भुगतान की मांग को लेकर सेवानिवृत्त शिक्षकों का क्रमिक धरना मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। रिटायर्ड प्रोफेसरों ने विश्वविद्यालय में ‘प्रशासनिक शून्यता’ का आरोप लगाते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और कृषि सचिव से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सेवानिवृत्त शिक्षक संघ का कहना है कि वर्षों से लंबित 07 सूत्रीय मांगों का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। संघ ने स्पष्ट किया कि जब तक पेंशन, DR और अन्य वैधानिक देयों का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।
कुलपति के बयान से बढ़ा विवाद
संघ के पदाधिकारियों का दावा है कि कुलपति के साथ हुई चर्चा में उन्होंने स्वीकार किया कि लेखा नियंत्रक उनके निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं और इस संबंध में उन्होंने राज्य शासन के वित्त सचिव को शिकायत भी भेजी है। संघ का आरोप है कि यदि कुलपति के निर्देशों का भी पालन नहीं हो रहा है, तो यह विश्वविद्यालय में प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर होने का संकेत है।
66 से 86 वर्ष के प्रोफेसर धरने पर
धरने में शामिल कई सेवानिवृत्त प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों की उम्र 66 से 86 वर्ष के बीच है। इनमें पूर्व कुलपति, अनुसंधान एवं विस्तार संचालक, कॉलेज डीन, विभागाध्यक्ष और योजना आयोग में कार्य कर चुके वरिष्ठ शिक्षाविद भी शामिल हैं। उनका कहना है कि जीवनभर विश्वविद्यालय की सेवा करने के बाद अपने वैधानिक अधिकारों के लिए धरना देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
राज्यपाल और सरकार से हस्तक्षेप की मांग
संघ ने मांग की है कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए, वर्षों से लंबित पेंशन प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जाए और शासन के आदेशानुसार महंगाई राहत (DR) सहित सभी देयों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और वैधानिक है तथा मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा।

